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पिछड़ा और दलित पर फोकस

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राहुल गांधी कांग्रेस संगठन में पिछड़े और दलित नेताओं को आगे ला रहे हैं। जब से उन्होंने जाति गणना और आरक्षण बढ़ाने का राग अलापना शुरू किया है तब से पहली बार वे कांग्रेस संगठन में इतने बड़े पैमाने पर बदलाव कर रहे हैं। आधिकारिक रूप से तो कहा जा रहा है कि मल्लिकार्जुन खड़गे बदलाव कर रहे हैं लेकिन फैसले सारे राहुल गांधी कर रहे हैं। उन्होंने अपने एजेंडे के मुताबिक पिछड़ी और दलित जातियों के नेताओं को संगठन में महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त करना शुरू किया है। ऐसा इसलिए भी जरूरी है क्योंकि जब वे पिछड़े और दलित हितों की बात करते हैं तो उनसे पूछा जाता है कि कांग्रेस संगठन में कितने दलित, पिछड़े हैं। सो, उन्होंने दो नए महासचिव बनाए हैं, जिनमें से एक भूपेश बघेल पिछड़ी जाति के हैं और दूसरे सैयद नासिर हुसैन मुस्लिम हैं। राहुल ने अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी प्रभारी महासचिवों में भी बीके हरिप्रसाद, अजय सिंह लल्लू, के राजू आदि को बड़े राज्यों का प्रभारी बना कर पिछड़े, दलित राजनीति को साधने का मैसेज दिया है।

इससे पहले कांग्रेस ने महाराष्ट्र में नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया। राहुल ने पिछड़ी जाति के नाना पटोले को हटाया तो उनकी जगह उन्हीं के कुनबी समुदाय से आने वाले हर्षवर्धन सपकाल को अध्यक्ष बनाया गया। ऐसे ही ओडिशा में शरत पटनायक की जगह दलित समाज से आने वाले भक्त चरण दास को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। बताया जा रहा है कि कर्नाटक में डीके शिवकुमार की जगह नया प्रदेश अध्यक्ष बनाने की बात हो रही है। अध्यक्ष पद के लिए दलित नेता जी परमेश्वरा का नाम चर्चा में है। तेलंगाना में भी पोन्नम प्रभाकर, कोंडा सुरेखा और महेश गौड़ा के नाम की चर्चा हो रही है। बिहार में अखिलेश प्रसाद सिंह की जगह नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाना है तो दो दलित नेताओं प्रतिमा दास और राजेश राम के नाम की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है। उत्तर प्रदेश में भी कांग्रेस अजय राय की जगह पिछड़ी जाति के किसी नेता को अध्यक्ष बना सकती है। हरियाणा में पहले से पार्टी ने दलित अध्यक्ष बना रखा है।

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