राहुल गांधी पंजाब में प्रदेश अध्यक्ष नहीं बदलने जा रहे हैं। उन्होंने दो टूक अंदाज में यह बात प्रभारी भूपेश बघेल को बता दी है और बघेल ने भी ऐसे ही साफ शब्दों में पंजाब कांग्रेस के बागी नेताओं यानी चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर रंधावा आदि को बता दिया है। तभी चन्नी और रंधावा गुट सीधे राहुल गांधी से मिलने का समय मांग रहा है। हालांकि लग नहीं रहा है कि राहुल उनसे मिलेंगे। सवाल है कि राहुल गांधी या प्रभारी भूपेश बघेल क्यों अमरिंदर सिंह राजा वारिंग पर इतना भरोसा कर रहे हैं? इसका सबसे बड़ा कारण तो यह है कि पिछले चार साल से कुछ ज्यादा तक लगातार वारिंग ने काम किया है और संगठन को मजबूत किया है। इसलिए चुनाव से ठीक पहले उनको हटा दिया जाएगा तो पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरेगा।
ध्यान रहे 2022 में विधानसभा का चुनाव हारने के बाद चन्नी नौ महीने तक विदेश में रहे थे। वे पंजाब छोड़ कर सीधे अमेरिका चले गए थे, जबकि उनको मुख्यमंत्री बना कर और उनके नेतृत्व में कांग्रेस ने चुनाव लड़ा था। जब वे सब छोड़ कर चले गए तब वारिंग ने पार्टी संभाली। उन्होंने अपने हिसाब से संगठन बनाया है। कहा जा रहा है कि पंजाब के 90 फीसदी से ज्यादा जिला अध्यक्ष वारिंग के साथ हैं। पार्टी के चार सांसद और 10 विधायक उनके साथ हैं। उनका जाट सिख होना भी उनके लिए सकारात्मक माना जा रहा है। इसके अलावा यह भी कहा जा रहा है कि पिछले चुनाव में मालवा क्षेत्र में 69 सीटों में कांग्रेस सिर्फ दो जीती थी, जिसमें एक सीट गिद्दरबाह से वारिंग जीते थे।
