Naya India-Hindi News, Latest Hindi News, Breaking News, Hindi Samachar

कैबिनेट विस्तार के बाद कर्नाटक में विवाद

केंद्र सरकार नारी शक्ति वंदन कानून में संशोधन करके अगले लोकसभा चुनाव से पहले महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण देने की तैयारी कर रही है। इस बीच यह खबर मीडिया में वायरल हो रही है कि कर्नाटक की कांग्रेस सरकार में एक भी महिला मंत्री नहीं है। इस बहाने राहुल गांधी की कथनी और करनी का भेद बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि राहुल महिलाओं, दलितों, आदिवासियों, अल्पसंख्यकों की सिर्फ बातें करते हैं। जब उनको सरकार बनाने का मौका मिलता है तो वे इन समुदायों के लोगों के तरजीह नहीं देते हैं।

असल में कर्नाटक में डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने के बाद पिछले दो महीने से सरकार सिर्फ 14 मंत्रियों के साथ काम कर रही थी। 224 की विधानसभा के हिसाब से राज्य में मुख्यमंत्री सहित 34 मंत्री बन सकते हैं। कहा जा रहा है कि शिवकुमार और सिद्धारमैया में तालमेल नहीं होने की वजह से मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं हो रहा था। पिछले गुरुवार को शिवकुमार ने दिल्ली में पार्टी आलाकमान से मुलाकात की और कैबिनेट विस्तार की हरी झंडी ली। उन्होंने 20 नए मंत्रियों को सरकार में शामिल किया।

नए मंत्रियों को लेकर नाराजगी है और पार्टी के एक विधायक यशवंतराय गौड़ा पाटिल ने विधानसभा से इस्तीफा दे दिया। पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया नए मंत्रियों के शपथ समारोह में शामिल नहीं हुए। कहा जा रहा है कि उनके करीबी विधायकों को मंत्री नहीं बनाया गया। राज्य सरकार में एकमात् महिला मंत्री के तौर पर गायत्री शांति गौड़ा को शामिल करने की चर्चा थी। लेकिन ऐन मौके पर उनका नाम काट दिया गया। सो, राज्य सरकार में कोई महिला मंत्री नहीं है। विधानसभा और विधान परिषद के पीठासीन अधिकारियों में भी कोई महिला नहीं है।

Exit mobile version