देश भर में क्रिकेट हो या फुटबॉल या दूसरा कोई भी खेल उनका प्रबंधन नेताओं के हाथ में ही है। एकाध अपवाद हो सकता है कि किसी खिलाड़ी को प्रबंधन में रखा गया हो लेकिन वह भी किसी न किसी राजनीतिक दल की कृपा से ही हुआ होगा। पहले कांग्रेस के हाथ में ताकत थी तो कांग्रेस का सब जगह कब्जा होता था और आज भाजपा के हाथ में ताकत है कि हर जगह उसका कब्जा है। राजीव शुक्ला अपवाद हैं। वे कांग्रेस और भाजपा की राजनीति से ऊपर हैं। बहरहाल, राजस्थान में क्रिकेट एसोसिएशन का चुनाव होने वाला है और उससे पहले एक बहुत ही दिलचस्प तस्वीर देखने को मिल रही है। आरसीए का चुनाव लड़ने के लिए दावेदारों की जो सूची सामने आई है उसमें लगभग सभी दावेदार किसी न किसी पार्टी के नेता हैं, विधायक हैं या विधायक व मंत्रियों के बेटे हैं। जिस अनुपात में भाजपा के विधायकों व मंत्रियों ने अपने बेटों को आगे किया है वह भी दिलचस्प है। चुनाव 29 सितंबर को होने वाले हैं।
शुरुआती दावेदारों की सूची में कांग्रेस के दिग्गज नेता, पूर्व केंद्रीय मंत्री और विधानसभा के पूर्व स्पीकर सीपी जोशी का भी नाम है। उनके अलावा राज्य के राजस्व मंत्री हेमंत मीणा भी हैं। कम से कम सात विधायकों के बेटे दावेदार हैं। खबरों के मुताबिक जसवंत यादव के बेटे मोहित यादव, महेंद्रजीत मालवीय के बेटे प्रताप मालवीय, राजेंद्र राठौड़ के बेटे पराक्रम सिंह, गजेंद्र सिंह खींवसर के बेटे धनंजय खींवसर, ओटाराम देवासी के बेटे विक्रम देवासी, मदन दिलावर के बेटे पवन दिलावर और घनश्याम तिवाड़ी के बेटे आशीष तिवाड़ी दावेदार हैं। इनके अलावा विधायकों में देखें तो कांग्रेस और भाजपा के से कम चार विधायक जयदीप बियाणी, दर्शन सिंह, रतन देवासी और रोहित बोहरा शामिल हैं। दिलचस्प यह है कि किसी ने क्रिकेट नहीं खेली और इनमें से किसी को वोटिंग का अधिकार नहीं है। फिर भी सब चुनाव लड़ना चाहते हैं।
