भारतीय जनता पार्टी चुनावों के समय हर तरह के उपाय आजमाती है। उपाय बहुत छोटा भी हो सकता है और संभव है कि उसका राजनीतिक असर नहीं हो फिर भी भाजपा प्रयास जरूर करती है। ऐसा ही एक प्रयास दिनेश त्रिवेदी को बांग्लादेश का उच्चायुक्त बनाने का है। दिनेश त्रिवेदी गुजरात के रहने वाले हैं। उनका पश्चिम बंगाल से जुड़ाव सिर्फ इतना है कि ममता बनर्जी ने उनको बैरकपुर सीट से चुनाव लड़ाया थी और सांसद बनाया था। बाद में थोड़े समय के लिए रेल मंत्री भी बनवाया था। केंद्र सरकार ने उनको बांग्लादेश का उच्चायुक्त बना कर यह मैसेज दिया है कि बांग्लादेश के साथ भारत के संबंधों को बेहतर किया जाएगा। इसका कितना असर होगा या दिनेश त्रिवेदी की वजह से भद्र लोक के कितने ब्राह्मण भाजपा की ओर आकर्षित होंगे यह नहीं कहा जा सकता है। लेकिन भाजपा ने प्रयास किया।
इससे पहले केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल के अशोक कुमार लाहिड़ी को नीति आयोग का उपाध्यक्ष बनवाया। प्रधानमंत्री नीति आयोग के पदेन अध्यक्ष होते हैं। नियुक्ति के बाद लाहिड़ी के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने की तस्वीरें सोशल मीडिया में वायरल हुईं। इसी तरह केंद्र सराकर ने वैज्ञानिक गोवर्धन दास को नीति आयोग का सदस्य बनाया। वे भी पश्चिम बंगाल के रहने वाले हैं। ये सब प्रतीकात्मक कदम हैं लेकिन राजनीति में ऐसे कदमों का भी महत्व होता है। इन कदमों के असर का आकलन अभी नहीं किया जा सकता है। लेकिन इससे यह अंदाजा जरुर होता है कि भाजपा कैसे चुनाव लड़ती है।
