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विमानन कंपनियों के सामने सरकार का सरेंडर

New Delhi, Dec 06 (ANI): Passengers wait at Terminal 1 of the Indira Gandhi International Airport as IndiGo’s flight disruptions continue nationwide, in New Delhi on Saturday. (ANI Photo)

यह बड़े कमाल की बात है कि एक हफ्ते पहले केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि वह विमानों का किराया तय करने के नियम बना रही है और जल्दी ही उसे अधिसूचित किया जाएगा। असल में सुप्रीम कोर्ट ने कई मौकों पर विमानों के बढ़ते किराए को लेकर चिंता जताई थी। नागरिक समूह तो काफी समय से यह मुद्दा उठा रहे हैं। तभी जब सरकार ने कहा कि वह किराए को विनियमित करने के लिए नए नियम ला रही है तो ऐसा लगा कि सरकार विमान किराए को नियंत्रित करने के नियम बनाएगी। ऐसे नियम लाए जाएंगे, जिनसे आम लोगों को राहत मिले। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

सरकार ने यह नियम बनाया है कि वह विमानों का किराया तय नहीं करेगी और न विनियमित करेगी। कंद्र सरकार ने कहा है कि विमानन कंपनियां अपने हिसाब से मांग और आपूर्ति को देखते हुए किराया तय करेंगी। यह मांस की रखवाली में गिद्ध को बैठाने जैसा काम है। पिछले कुछ दिनों से विमानन कंपनियों के इस खेल को कई लोगों ने उजागर किया है। बुकिंग के समय कोई भी सीट मुफ्त में उपलब्ध नहीं दिखाई जाती है और यात्रियों को टिकट लेने के बाद सीट के लिए अलग से पैसे देने पड़ते हैं। लेकिन विमानन में जाने पर बड़ी संख्या में सीटें खाली दिखती हैं। विमानन कंपनियां मनमाने तरीके से किराया वसूल रही हैं और ऊपर से अतिरिक्त पैसे भी ले रही हैं।

सरकार ने जो कथित नियम बनाए हैं उनमें कहा है कि प्राकृतिक या किसी अन्य आपात स्थिति में ही सरकार किराया नियमित करेगी। हालांकि उसमें भी सरकार कुछ नहीं कर पाती है। पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले से लेकर महाकुंभ के आयोजन तक यह दिखा कि सरकार के निर्देश के बावजूद कंपनियों ने कई गुना ज्यादा किराया वसूल किया। उन्होंने सरकार के निर्देश का पालन नहीं किया और सरकार कुछ नहीं कर सकी। कंपनियां ईंधन की महंगाई के आधार पर किराया बढ़ा रही हैं। लेकिन असलियत यह है कि सरकार ने अपनी नीतियों के कारण दो कंपनियों का एकाधिकार बनाया है। सोचें, पिछले एक साल में घरेलू उड़ानों मे 35 से लेकर 115 फीसदी तक किराया बढ़ा है और सरकार कुछ नहीं कर पाई है।

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