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कैबिनेट का इंतजार भी लंबा चलेगा

जिस तरह से संसद के विशेष सत्र का इंतजार खत्म नहीं हो रहा है वैसे ही कैबिनेट में फेरबदल का इंतजार भी समाप्त नहीं हो रहा है। संसद के मानसून सत्र के अनिश्चितकाल तक स्थगित हुए 84 दिन हो गए हैं लेकिन अभी तक उसका सत्रावसान नहीं किया गया है। कहा जा रहा है कि सरकार दो तिहाई बहुमत का इंतजाम कर रही है। उसके बाद विशेष सत्र बुलाया जाएगा और महिला आरक्षण कानून में संशोधन और परिसीमन बिल पास कराने का प्रयास होगा। हालांकि अब उसका समय लगभग निकल चुका है। अब शीतकालीन सत्र का समय आ गया है। इसलिए सरकार क विशेष सत्र की जरुरत नहीं पड़ेगी। लेकिन इसी इंतजार में नरेंद्र मोदी की तीसरी सरकार की पहली फेरबदल का इंतजार काफी लंबा होता जा रहा है। अब मंत्रिमंडल में शामिल होने की इच्छा रखने वाले और निकाले जाने की चिंता में परेशान नेता भी कोई नई डेडलाइन नहीं दे रहे हैं।

असल में पिछले दिनों कहा गया था कि सरकार पहले महिला आरक्षण कानून में संशोधन का बिल और परिसीमन बिल पास कराएगी उसके बाद ही कैबिनेट में फेरबदल होगी। इसका कारण यह बताया जा रहा था कि भाजपा के संसदीय प्रबंधक कई पार्टियों से बात कर रहे हैं, जिनके नेताओं को मंत्री बनाने का भरोसा दिया जा रहा है। ऐसे में किसी का भरोसा तोड़ने का रिस्क संसद सत्र से पहले नहीं लिया जा सकता है। इसमें खासतौर से एकनाथ शिंदे की शिवसेना,. शरद और सुनेत्रा पवार दोनों की एनसीपी, एमके स्टालिन की डीएमके आदि पार्टियों का नाम लिया जा रहा है। हालांकि शरद पवार और स्टालिन की पार्टी सरकार में शामिल होगी, इसे लेकर अब भी संशय है। परंतु यह बात लगभग तय है कि शरद पवार की पार्टी परिसीमन और महिला आरक्षण का समर्थन करेगी। डीएमके भी कुछ अगर मगर के साथ समर्थन के मूड में है। लेकिन इतने से सरकार दो तिहाई संख्या नहीं पूरी कर पा रही है। अगर संख्या पूरी नहीं होती है तो यह तय है कि शीतकालीन सत्र से पहले फेरबदल नहीं होगी।

कई जानकारों ने पहले दशहरा से दिवाली के बीच यानी 20 दिन का विंडो दिया था। उनका कहना था कि इस बीच सारे बड़े फैसले होने हैं। लेकिन अब दिवाली आ गई। अब अगले कुछ दिन तक कोई फेरबदल नहीं होने वाली है। अब त्योहार शुरू हो गए हैं। शुक्रवार, छह नवंबर को धनतेरस है। उसके बाद छोटी दिवाली, फिर दिवाली, फिर गोवर्धन पूजा और उसके बाद भाईदूज। फिर पूर्वी भारत में तीन दिन तक छठ की धूम। छठ के बाद संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने का समय आ जाएगा। सत्र के दौरान कोई फेरबदल नहीं होगी। शीतकालीन सत्र आमतौर पर 20 दिसंबर के आसपास खत्म होता है और उससे पहले 15 दिसंबर से 14 जनवरी तक मलमास शुरू हो जाता है। उस बीच कोई बड़ा काम नहीं होता है। 15 जनवरी के बाद संसद के बजट सत्र की उलटी गिनती शुरू हो जाती है। 28 जनवरी से बजट सत्र होता है। सो, अगर शीतकालीन सत्र में सरकार चमत्कारिक तरीके से दो तिहाई बहुमत जुटा लेती है और महिला आरक्षण कानून में संशोधन का बिल पास करा लेती है तब भी 15 जनवरी से पहले फेरबदल की संभावना कम दिख रही है। उसके बाद बजट सत्र से पहले का 13 दिन का विंडो है। ध्यान रहे बजट सत्र के बीच ही उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों के चुनाव की घोषणा हो जाएगी और बजट सत्र के पहले व दूसरे चऱण के बीच इन राज्यों में चुनाव होगा। सो, अप्रैल में बजट सत्र के बाद ही मंत्रिमंडल में फेरबदल की संभावना दिख रही है।

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