हरियाणा के राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस का इतिहास अपने को दोहरा सकता है। कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार करमबीर बौद्ध चुनाव हार भी सकते हैं। आरके आनंद और अजय माकन राज्यसभा का चुनाव हारे थे। तभी इस बार प्रदेश कांग्रेस की ओर से कहा गया था कि राय मशविरा करके किसी अच्छे नेता को उम्मीदवार बनाया जाए। परंतु राहुल गांधी ने अपनी पसंद से करमबीर बौद्ध को उम्मीदवार बनाया, जो पार्टी के नेता नहीं हैं। वे सरकारी कर्मचारी थे और नौकरी से रिटायर हुए हैं। कांग्रेस नेता इससे नाराज हैं। वे इस बात से भी नाराज हैं कि बौद्ध जब पार्टी नेताओं जैसे भूपेंद्र सिंह हुड्डा या राव नरेंद्र सिंह से मिलने गए तो उन्होंने कांग्रेस का पटका नहीं पहना था, बल्कि नीले रंग का पटका गले में डाला हुआ था। पार्टी में यह सवाल भी उठ रहा है कि राहुल को अगर दलित उम्मीदवार ही देना था तो किसी दूसरी जाति का देते क्योंकि करमबीर जिस जाति के हैं उस जाति के दो लोकसभा सांसद पहले से हैं।
बहरहाल, कांग्रेस ने क्रॉस वोटिंग से बचने के लिए अपने सभी विधायकों को हिमाचल प्रदेश में रखा है और सोमवार को वोटिंग के समय उनको लाया जाएगा। लेकिन जानकार सूत्रों का कहना है कि इस बार भी 12 से 13 विधायक क्रॉस वोटिंग करेंगे। भाजपा के पास 51 विधायकों का समर्थन है। एक सीट जीतने के लिए 31 वोट की जरुरत है। यानी एक सीट जीतने के बाद उसके पास 20 वोट बचेंगे। उसे 11 भाजपा समर्थित निर्दलीय सतीश नंदल को 11 अतिरिक्त वोट की जरुरत है। अगर इनेलो के दो विधायक समर्थन नहीं भी दें और कांग्रेस के 37 में से 12 से 13 लोग क्रॉस वोटिंग करें तो करमबीर बौद्ध हार जाएंगे और नंदल जीत जाएंगे।
ध्यान रहे राज्यसभा चुनाव ओपन बैलेट से होता है लेकिन दलबदल कानून लागू नहीं होता है। यानी क्रॉस वोटिंग करने पर सदस्यता नहीं जाती है। बताया जा रहा है कि भाजपा की ओर से कांग्रेस विधायकों को बहुत आकर्षक प्रलोभन दिए गए हैं। कहा गया है कि अगर कांग्रेस इन विधायकों की सदस्यता खत्म करने के लिए स्पीकर को लिखती है तो स्पीकर उसे लंबित भी रख सकते हैं या क्रॉस वोटिंग करने वालों को अलग गुट की मान्यता भी दे सकते हैं। यह भी कहा गया है कि कांग्रेस विधायकों को भाजपा सत्तापक्ष के विधायकों को मिलने वाले सारे लाभ देगी और उनके क्षेत्र के सारे काम किए जाएंगे। यह प्रलोभन भी दिया गया है कि क्रॉस वोटिंग करने वालों के क्षेत्र में परिसीमन का काम उनके हिसाब से होगा। एक सबसे बड़ा प्रलोभन यह है कि आज क्रॉस वोटिंग करते हैं तो 2028 में भी उनको ऐसे ही वोट डालने का मौका मिलेगा। बाकी क्रॉस वोटिंग के लिए जो मिलता है वह तो मिलेगा ही।
