यह बड़ा सवाल है कि बिहार सरकार में शामिल और लगभग बराबर की भूमिका निभा रही जनता दल यू अगर अपनी ही सरकार के फैसलों का विरोध जारी रखती है तो वह इसे लेकर कहां तक जा सकती है? जदयू ने शिक्षा में हो रहे बदलावों से जुड़े दो फैसलों का विरोध किया है। पहला फैसला तो डिग्री कॉलेज और पीजी कॉलेज अलग करने और डिग्री कॉलेजों को सीधे सरकार के शिक्षा विभाग के अधीन लाने के प्रस्ताव का है। इसका विरोध तो भाजपा के भी कुछ विधायकों और अन्य नेताओं ने किया है। पटना से लेकर दिल्ली तक अलग अलग विश्वविद्यालयों के शिक्षकों ने भी इसका विरोध किया है। दूसरा मामला राज्य के मॉडल स्कूलों का नाम और रंग बदलने का है।
राज्य सरकार ने तय किया है कि साढ़े पांच सौ स्कूलों को मॉडल स्कूल बनाया जाएगा। इनका नाम सरस्वती विद्या निकेतन रखा गया है। यह फैसला किया गया है इन स्कूलों का रंग बदला जाएगा। इन्हें भगवा रंग में रंगने का निर्देश दिया गया है। जदयू नेताओं ने सरस्वती विद्या निकेतन को भाजपा के सरस्वती शिशु मंदिर से तो नहीं जोड़ा है लेकिन रंग को लेकर आपत्ति जताई है। पार्टी के नेताओं ने कहा है कि शिक्षा का एक ही रंग होता है और उसे कोई दूसरा रंग देने की जरुरत नहीं है। पार्टी के प्रवक्ता नीरज कुमार ने यह मुद्दा उठाया है। लेकिन कहा जा रहा है कि पार्टी के बड़े नेता तय करेंगे कि इन दोनों मुद्दों को आगे बढ़ाना है या नहीं।
