भाजपा के संगठन पदाधिकारियों में सबसे दिलचस्प किस्सा राम माधव का है। राम माधव इन सभी महासचिवों में से सबसे पुराने हैं। वे पहले भी महासचिव रहे हैं और राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के प्रवक्ता थे। भाजपा के संगठन में उन्होंने कई अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं। लेकिन संयोग से वे अभी तक किसी सदन के सदस्य नहीं बन पाए हैं। वे संघ की ओर से भाजपा की सक्रिय राजनीति में भेजे जाने के बाद भी चुनाव नहीं लड़े हैं। यह भी बहुत दिलचस्प है कि भाजपा की राजनीति में आने के बाद कई बार उनको राज्यसभा भेजे जाने की चर्चा रही है।
इस बार फिर चर्चा है कि राम माधव को राज्यसभा भेजा जा सकता है। ध्यान रहे वे कई बार विवादों में रहे। जम्मू कश्मीर में पीडीपी और मुफ्ती परिवार के साथ तालमेल कराने में उनकी भूमिका मानी जाती है। पूर्वोत्तर में भी वे विवादों में घिरे। कुछ समय पहले उन्होंने अमेरिका में एक कार्यक्रम में कह दिया था कि भारत ने अमेरिका के दबाव में रूस से तेल खरीदना कम कर दिया है। हालांकि बाद में इसके लिए माफी मांगी। तमाम विवादों के बावजूद कहा जाता है कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रिय हैं। इसलिए इस बार शायद उनको भी राज्यसभा मिल जाए। नवंबर में ही वे भी राज्यसभा जाएंगे या उनके एक दो साल इंतजार करना पड़ेगा यह नहीं कहा जा सकता है।
