उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव की घोषणा हो गई है। उत्तराखंड की एक सीट पर भी चुनाव होगा और पश्चिम बंगाल की एक सीट पर उपचुनाव होगा। लेकिन सबकी नजर उत्तर प्रदेश की 10 सीटों पर है। राज्य में अगले साल फरवरी में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिहाज से राज्यसभा सीटों के लिए प्रत्याशी चुने जाएंगे। रिटायर हो रहे सदस्यों में भाजपा के दो ब्राह्मण सांसद हैं। एक दिनेश शर्मा ने इस्तीफा दे दिया है। उनको अंडमान और निकोबार द्वीप समह का उप राज्यपाल बनाया गया है। दूसरी सदस्य सीमा द्विवेदी हैं। अब देखना होगा कि भाजपा दो ब्राह्मण भेजती है या दिनेश शर्मा को उप राज्यपाल बनाने से एक सीट कम होगी? हाल ही में महासचिव बनाए गए हरीश द्विवेदी को राज्यसभा भेजने की चर्चा हो रही है। अगर उनका नाम तय होता है तो सीमा द्विवेदी को रिपीट किया जाएगा या नहीं बड़ सवाल है।
इसी तरह अरुण सिंह को रिपीट किए जाने को लेकर भी सवाल है। वे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के रिश्तेदार हैं और भाजपा के महासचिव रहे हैं। हालांकि इस बार उनको महासचिव नहीं बनाया गया है। भाजपा को कम से कम एक राजपूत सांसद भेजना है। वह अरुण सिंह होंगे या कोई और यह देखना होगा। बताया जा रहा है कि हाल में महासचिव बनाई गईं स्मृति ईरानी राज्यसभा की एक सीट की दावेदार हैं। वे अमेठी से चुनाव हार गई थीं और अगली बार उनको रायबरेली से राहुल के खिलाफ लड़ाने की तैयारी है। ऐसे में उनको यूपी से राज्यसभा भेजा जाए तो उसका असर होगा। जानकार सूत्रों का कहना है कि ब्राह्मण और राजपूत की संख्या सीमित करके भाजपा इस बार ज्यादा गैर यादव पिछड़ा और दलित चेहरा राज्यसभा भेजेगी।
उत्तर प्रदेश में सीटों का गणित देखें तो भाजपा के पास अपने 256 विधायक हैं और सहयोगी पार्टियों को मिला कर 294 हो जाती है। सपा के 102 विधायक हैं। राज्य में एक सीट जीतने के लिए 37 वोट की जरुरत होगी। इस लिहाज से भाजपा के खाते में आठ और समाजवादी पार्टी के खाते में दो सीटें जाएंगी। बसपा अपनी इकलौती सीट गंवा देगी। उसके पास राज्य विधानसभा में एक भी विधायक नहीं है। रिटायर हो रहे सांसदों में भी भाजपा के आठ सांसद हैं। इसलिए वहां उलटफेर नहीं है।
