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पंजाब कांग्रेस का विवाद कैसे खत्म होगा

राहुल गांधी ने पंजाब कांग्रेस के नेताओं को बहुत सख्त संदेश दिया है। दिल्ली में पिछले दिनों पंजाब कांग्रेस के नेताओं की बैठक हुई, जिसमें आलाकमान की ओर से कहा गया कि नेता आपस में लड़ना बंद करें। यह भी कहा गया कि जाति और धर्म का मामला उठा कर पंजाब कांग्रेस के नेता आम आदमी पार्टी और अकाली दल को मजबूत कर रहे हैं। उसके बाद से शांति बहाली हो गई है। लेकिन विवाद खत्म नहीं हुआ है। असल में पंजाब में अगले साल चुनाव होने वाले हैं। फरवरी में चुनाव होगा। उससे पहले कांग्रेस के नेता अभी से नेतृत्व का मुद्दा सुलझाने में लग गए हैं। इसी वजह से दलित बनाम जाट का विवाद भी शुरू हुआ है। गौरतलब है कि कांग्रेस ने पिछले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया था। दलित सीएम बनाने का यह दांव कामयाब नहीं हुआ लेकिन चन्नी को कांग्रेस ने एक बड़े दलित चेहरे के तौर पर स्थापित कर दिया है।

अब चरणजीत सिंह चन्नी अपने को नेतृत्व का स्वाभाविक दावेदार मान रहे हैं। वे लोकसभा का चुनाव जीत गए और कृषि मामलों की संसदीय समिति के अध्यक्ष भी बनाए गए हैं। उन्होंने पंजाब में 35 से 38 फीसदी दलित आबादी होने का मुद्दा उठाया और अपनी दावेदारी घोषित की। वे चाहते हैं कि अगले साल चुनाव के लिए उनको मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि दलितों की अनदेखी होती है। इस पर प्रदेश अध्यक्ष राजा अमरिंदर सिंह वारिंग ने याद दिलाया कि पार्टी आलाकमान कैप्टेन अमरिंदर सिंह की जगह सुखजिंदर सिंह रंधावा को सीएम बनाने जा रहा थे। लेकिन एक जाट की दावेदारी खत्म कर दलित सीएम के रूप में चन्नी को शपथ दिलाई गई। इससे दलित बनाम जट्ट सिख का विवाद तेज हुआ है। दूसरे स्तर पर जट्ट सिख नेताओं रंधावा और वारिंग का अलग विवाद है। इस बीच नवजोत सिंह सिद्धू अपने लिए प्रासंगिकता तलाश रहे हैं। इस विवाद में ही प्रताप सिंह बाजवा भी अपने लिए अवसर देख रहे हैं। इस बीच वारिंग ने कह दिया कि राज्य की 117 में से 80 सीटों पर नए उम्मीदवार उतारे जाएंगे। इसके बाद चन्नी समर्थक नेताओं ने आलाकमान तक अपनी शिकायत पहुंचाई।

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