पांच राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। इसमें कांग्रेस के लिए सबसे आदर्श स्थिति दक्षिणी राज्यों में है। चुनाव से पहले हो रहे सर्वेक्षणों में बताया जा रहा है कि कांग्रेस केरल में चुनाव जीत सकती है। तमिलनाडु में भी डीएमके और कांग्रेस का गठबंधन वापस सत्ता हासिल कर सकता है। लेकिन केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में मामला उलझा हुआ है। 30 विधानसभा सीटों वाले राज्य पुडुचेरी में 2016 में कांग्रेस जीती थी और दिल्ली में अहमद पटेल के बहुत करीबी रहे वी नारायणसामी को मुख्यमंत्री बनाया गया था। लेकिन उन्होंने ऐसी सरकार चलाई कि 2021 के चुनाव में कांग्रेस बहुत बुरी तरह से हारी और कांग्रेस के कारण डीएमके भी हारी।
इस बार भी अगर पुडुचेरी में एनडीए चुनाव जीतता है तो उसका कारण कांग्रेस पार्टी होगी। कांग्रेस के खिलाफ पुडुचेरी में साफ साफ विरोध दिख रहा है। इसके बावजूद जैसे पिछली बार कांग्रेस ने जिद करके ज्यादा सीटें लीं और गठबंधन को हराया उसी तरह इस बार भी वह ज्यादा सीटें लेकर लड़ रही है। जानकार सूत्रों का कहना है कि अगर उसने तमिलनाडु की तरह डीएमके को गठबंधन का नेतृत्व करने दिया होता तो हो सकता है कि जीत हो जाती। गौरतलब है कि 2021 में कांग्रेस 14 सीटों पर लड़ी थी और सिर्फ दो सीट जीत पाई। दूसरी ओऱ डीएमके 13 सीटों पर लड़ कर छह पर जीती। इससे पहले 2016 में कांग्रेस ने 17 सीटें थीं। नारायणसामी ने कांग्रेस को 17 से दो सीट पर ला दिया। इस बार भी कांग्रेस ने जिद करके 16 सीटें ली हैं और डीएमके को पहले की तरह 13 सीटें दी हैं। हालांकि बाद में कांग्रेस ने पांच और सीटों पर उम्मीदवार उतार दिए, जिनकी वजह से कई सीटों पर दोस्ताना मुकाबला हो गया है। तभी अगर इस बार भी गठबंधन हारता है तो जिम्मेदारी कांग्रेस की होगी।
