केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई के चेयरमैन और सचिव को हटाने के फैसले का कोई मतलब नहीं है। असली सवाल यह है कि जांच के लिए जो एक सदस्यीय कमेटी बनी है उसकी रिपोर्ट में क्या बताया जाता है और उसके आधार पर शिक्षा मंत्रालय क्या कदम उठाता है? उस जांच कमेटी को कुछ भी ज्यादा करने की जरुरत नहीं है क्योंकि 17 से 18 साल की उम्र के तीन छात्रों ने इतनी गड़बड़ियां खोज दी हैं कि उन्हीं की सूची बना कर दे दी जाए तो काम पूरा हो जाएगा। वेदांत श्रीवास्तव, सार्थक सिद्धांत और निसर्ग अधिकारी ने सीबीएसई की ओर से ऑन लाइन मार्किंग यानी ओएसएम के लिए जो टेंडर निकाला गया था उसमें और बाद में जो ओएसएम लागू किया गया उसमें भी जो गड़बड़िंयां थीं उनके सामने ला दिया है।
केंद्र सरकार की कमेटी के सामने एक तैयार रेफरेंस है। सार्थक सिद्धांत तो शिक्षा मंत्रालय की संसदीय समिति के सामने भी पेश हुए थे और अपने सात पन्नों के प्रेजेंटेशन में ठेके की एक दर्जन गड़बड़ियां बता दी थीं। इसके अलावा ओएसएम में जो गड़बड़ी है, सीबीएसई की वेबसाइट में जो समस्याएं हैं उनके बारे में वेदांत और निसर्ग ने विस्तार से बताया है। सीबीएसई की अपनी टीम ने भी इसमें कई गड़बड़ियों का पता लगा लिया है। यह रिपोर्ट भी आई है कि पहले भी सीबीएसई को बताया गया था कि ओएसएम में गड़बड़ी है। शिक्षकों ने बताया था कि पूरे अंक का जोड़ कई बार गलत आ रहा है, कई बार दो पार्ट के सवाल में से एक ही पार्ट का अंक दिखाई दे रहा है, कई बार ऐसे सवाल का नंबर भी जुड़ रहा है, जो छात्र ने हल नहीं किया है, कई बार ओएसएम की स्क्रीन फ्रीज हो रही है आदि आदि। लेकिन सीबीएसई ने इन पर ध्यान ही नहीं दिया। इसी तरह ठेका देने में जो शर्तें बदली गई थीं उससे भ्रष्टाचार का संकेत मिलता है। उम्मीद करनी चाहिए कि सरकार और सीबीएसई इससे सबक लेकर एक फुलप्रूफ सिस्टम बनाएंगे।
