सोनम वांगचुक के भूख हड़ताल खत्म करने और कॉकरोच जनता पार्टी के प्रतिनिधियों के साथ सरकार की बातचीत के दौरान जिस तरह सरकार ने पहली दो मांगें मान ली थीं उससे लग रहा था कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी मान ली जाएगी और आंदोलन जल्दी खत्म हो जाएगा। लेकिन जैसा हर बार होता है, इस बार भी एक साजिश थ्योरी चल रही थी। सरकार के लचीलापन दिखाने के बावजूद कहा जा रहा था कि आंदोलन अगस्त तक जा सकता है क्योंकि इसके पीछे विदेशी फंडिंग और विपक्ष की बड़ी तैयारी काम कर रही है। इस बीच यह भी दिख रहा था कि सरकार एक तरफ बात कर रही थी और दूसरी ओर छात्रों और युवाओं के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी भी कर रही थी। सरकार नए मुकदमे दर्ज करा रही थी और छात्रों के आंदोलन में शामिल कथित आपराधिक छवि वाले लोगों की पहचान कर रही थी।
आंदोलन को लेकर जो साजिश थ्योरी चल रही थी उसके मुताबिक यह प्रचारित हो रहा था कि आंदोलन को विपक्ष परदे के पीछे से सपोर्ट कर रहा है और कुछ दूसरे तत्व भी सपोर्ट कर रहे हैं, जिनका मकसद इसे लंबा खींचने का है। साजिश थ्योरी का प्रचार करने वाले कह रहे थे कि आंदोलन अगस्त तक जा सकता है। यह भी कहा जा रहा था कि किसान आंदोलन के समय जिस तरह लाल किले के पास तक प्रदर्शन पहुंच गया था और बड़ा हंगामा हुआ था उस तरह का कुछ करने की योजना है। कहा जा रहा था कि अभी आंदोलन को चलाए रखा जाएगा और अगस्त के पहले हफ्ते में 15 अगस्त को लाल किले की ओर कूच करने का ऐलान होगा। सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा था कि आंदोलन को लंबा खींचने, इसे फंडिंग देने, जंतर मंतर पर खाना पहुंचवाने वालों की पहचान हो गई है। लेकिन अंत में ऐसा कुछ नहीं निकला और आंदोलन समाप्त हो गया।
