केंद्रीय गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस इस मकसद में कामयाब हो गए कि उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी, आम आदमी पार्टी और लेफ्ट पार्टियों के प्रदर्शनकारियों को जंतर मंतर पर नहीं पहुंचने दिया। लेकिन क्या उनको अंदाजा है कि इससे एक लोकतांत्रिक देश के रूप में भारत की छवि पर क्या असर पड़ा है? भारत को क्या कीमत चुकानी पड़ रही है? लोग सोशल मीडिया में अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप के अखबारों के पहले पन्ने की तस्वीरें शेयर कर रहे हैं। ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने पहले पन्ने पर खबर छापी है, जिसमें कई पुलिस वाले एक महिला प्रदर्शनकारी को उठा कर ले जा रहे हैं।
इतना ही नहीं अभूतपूर्व पुलिस कार्रवाई का संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी संज्ञान लिया है। संयुक्त राष्ट्र संघ के ऑफिस ऑफ ह्यूमन राइट्स कमीशन यानी ओएचसीएचआर ने शनिवार, 10 अक्टूबर के घटनाक्रम पर चिंता जताई है। इसके प्रवक्ता ने बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ताओं, वकीलों और पत्रकारों को हिरासत में लिए जाने पर चिंता जताई है। स्थिति यह है कि संयुक्त राष्ट्र संघ की संस्था को दिल्ली पुलिस के अधिकारियों से यह अपील करनी पड़ी है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से लोगों के इकट्ठा होने और प्रदर्शन करने के अधिकार को बाधित न करें। उसने भारत सरकार के अधिकारियों से कहा है कि वह छात्रों और युवाओं से संवाद करे। हर बार की तरह भारत सरकार ने इसे देश के आंतरिक मामले में हस्तक्षेप बताते हुए इसे खारिज किया है। लेकिन खारिज करने से हालात नहीं बदलेंगे। दुनिया भर में पुलिस कार्रवाई की तस्वीरें वायरल हो रही हैं।
