पता नहीं यह होशियारी कितना काम आएगी लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं है कि भाजपा के चतुर सुजान नेताओं के मुकाबले झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ज्यादा होशियार साबित हुए हैं। दिल्ली के जंतर मंतर पर हुए छात्र आंदोलन की तर्ज पर झारखंड में भी आंदोलन हो रहा है। राजधानी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्र 15 दिन से आंदोलन कर रहे हैं। एक हफ्ते से कई छात्र भूख हड़ताल पर हैं। जैसे जंतर मंतर पर नीट यूजी पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन हो रहा था वैसे झारखंड में 14वीं जेपीएससी की परीक्षा रद्द करने और जेएसएससी की परीक्षा में गड़बड़ियों की जांच करने के लिए आंदोलन हो रहा है। झारखंड लोक सेवा आयोग यानी जेपीएससी की परीक्षा में गड़बड़ी हुई है इसके प्रत्यक्ष सबूत मिल चुके हैं और सरकार की सीआईडी इनकी जांच कर रही है। छात्र चाहते हैं कि यह जांच सीबीआई को सौंपी जाए।
रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आंदोलन का मंच वैसे ही सजा है, जैसे जंतर मंतर पर सजा था। जंतर मंतर पर जुट रही भीड़ को खाना खिलाने वाले लोग रांची भी पहुंच गए हैं। दिल्ली वाले सारे यूट्यूबर्स रांची भी पहुंचे हैं। इनमें से दो चार लोगों को छोड़ दें तो बाकी सिर्फ व्यूज और लाइक्स के चक्कर में वहां वीडियो बना रहे हैं। दो चार लोग सरोकार वाले हैं। ऐसे भी हैं, जिनको यह साबित करना है कि वे सिर्फ भाजपा के खिलाफ आंदोलन कवर नहीं करते हैं, बल्कि जेएमएम और कांग्रेस की सरकार के खिलाफ हो रहे आंदोलन को कवर करने भी पहुंचते हैं। सो, रांची में पूरा मजमा लगा है। सरकार ने मंत्रियों की एक कमेटी बना दी है, जो प्रदर्शनकारी छात्रों के प्रतिनिधिमंडल से बात कर रहे हैं।
अब सवाल है कि इसमें होशियारी क्या है? होशियारी यह है कि झारखंड की सरकार ने छात्रों के आंदोलन को तीन गुट में बांट दिया है। इससे आंदोलन कमजोर हुआ है और सरकार के मोलभाव की ताकत बढ़ी है। दूसरी होशियारी यह है कि भाजपा को इस आंदोलन में घुसने का ज्यादा मौका नहीं मिल रहा है क्योंकि तीनों गुटों से सरकार बात कर रही है। एक गुट तो सरकार का ही है। ध्यान रहे कम्युनिस्ट पार्टियां राज्य सरकार को समर्थन दे रही हैं। वे सत्तारूढ़ ‘इंडिया’ ब्लॉक के साथ हैं। इसलिए सीपीआई माले के छात्र संगठन आईसा की छात्र नेता नेहा बोरा का आंदोलन एक तरह से सरकार का समर्थन ही कर रहा है। वे अपने भाषणों में भाजपा और आरएसएस को ही निशाना बना रही हैं। छात्रों ने पहले छह अगस्त को यानी मानसून सत्र के पहले दिन विधानसभा का घेराव करने का ऐलान किया था। लेकिन एक दिन पहले सरकार ने कमेटी बना दी तो छात्रों ने इसे 10 अगस्त तक टाल दिया। लेकिन नेहा के नेतृत्व में आईसा के लोग सात अगस्त को विधानसभा घेरने निकल गए। उसका कोई असर नहीं हुआ। इसी तरह आंदोलन की जगह पर एक गुट देवेंद्र नाम महतो का है और दूसरा पीयूष कुमार का है। सरकार के प्रतिनिधियों ने दोनों गुट के नेताओं से अलग अलग बात की है। इनमें से एक गुट को जयराम महतो का समर्थन है, जो झारखंड विधानसभा के सदस्य हैं। वे अपनी पार्टी के इकलौते विधायक हैं। राज्यसभा चुनाव में उन्होंने रिलायंस समूह के परिमल नाथवानी का समर्थन किया था। अभी किसके लिए काम कर रहे हैं इसे लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं। इस पूरी प्रक्रिया में छात्र आंदोलन बहुत असरदार नहीं हो पा रहा है।
