दक्षिण के राज्य राजनीति में भी अक्सर नए प्रयोग करते हैं। केंद्रीय मंत्री और जेडीएस के नेता एचडी कुमारस्वामी का रविवार, 23 अगस्त को ऐसा ही एक प्रयोग देखने को मिला। रविवार को दिल्ली के कई बड़े अंग्रेजी अखबारों का पहला पूरा पन्ना कर्नाटक सरकार के ऊपर भ्रष्टाचार के आरोप की खबरों और टिप्पणियों से भरा था। उसमें कुमारस्वामी की पार्टी का नाम या चुनाव चिन्ह नहीं था। उनकी फोटो भी नहीं थी। उनका सिर्फ एक बड़ा सा कमेंट छपा था, जिससे अंदाजा होता है कि यह विज्ञापन उन्होंने या उनकी पार्टी ने छपवाया है।
इस विज्ञापन में अपनी ओर से कुछ नहीं कहा गया है। कर्नाटक हाई कोर्ट के एक फैसले को विस्तार से छाप दिया गया है। असल में जुलाई के अंत में हाई कोर्ट ने एक फैसले में कहा कि हजारों करोड़ रुपए की बेंगलुरु मैसुरु इंफ्रास्ट्रक्टर कॉरिडोर यानी बीएमआईसी कर्नाटक के सबसे बड़े घोटालों में से एक है। हाई कोर्ट की टिप्पणी के इस वाक्य को प्रमुखता से छापा गया है। उसके बाद हाई कोर्ट की ओर से कही गई बातों के छोटे छोटे अंश छापे गए हैं। विधानसभा कमेटी की की एक सिफारिश को अलग बॉक्स में छापा गया है, जिसमें बताया गया है कि सरकारी खर्च से बने इस कॉरिडोर का संचालन करने वाली निजी कंपनी से वसूली की जाए। बड़ी होशियारी से इस विज्ञापन को यह रूप दिया गया है, जिसमें किसी तरह की राजनीति न दिखाई दे। ऐसा लगे जैसे जागरूक नागरिक की ओर से अदालत की टिप्पणी के हवाले से राज्य सरकार के भ्रष्टाचार की पोल खोली जा रही है।
