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सिद्धारमैया के चाहने से कुछ नहीं होगा

कर्नाटक के निवर्तमान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को वास्तविकता स्वीकार कर लेनी चाहिए। वे मुख्यमंत्री पद से हट रहे हैं। उनकी जगह डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री बन रहे हैं। सो, यह नहीं होगा कि शिवकुमार मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठ जाएंगे और सिद्धारमैया को उनके मन के काम करने देंगे। जैसे सिद्धारमैया मुख्यमंत्री थे और सारे फैसले अपने हिसाब से करते थे उसी तरह शिवकुमार काम करेंगे। वे खुद एक बड़े सामाजिक समूह वोक्कालिगा का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनके मुख्यमंत्री बनने से वोक्कालिगा कांग्रेस के साथ जुड़ेगा। पिछली बार इसी वोट से कांग्रेस जीती थी।

कांग्रेस आलाकमान अभी सिद्धारमैया की बात सुन रहा है क्योंकि सत्ता का हस्तांतरण उसे सहज तरीके से कराना है। उसके बाद उनकी कोई हैसियत नहीं रह जाएगी। अगर वे समझ रहे हैं कि राहुल गांधी के सामने भावनात्मक कार्ड खेलेंगे, राज्यसभा नहीं लेंगे तो राज्य में ताकत बनी रहेगी तो यह गलतफहमी है। कांग्रेस को पता है कि जिस अहिंदा वोट का नेता होने की बात सिद्धारमैया कर रहे हैं उसमें मुख्य रूप से दलित और मुस्लिम हैं, जो कांग्रेस का साथ नहीं छोड़ने वाले हैं। पिछड़ी जातियों में भी कुरुबा को छोड़ कर बाकी जातियां सिद्धारमैया के हिसाब से काम करेंगी ऐसा भी नहीं है। एक बार शिवकुमार मुख्यमंत्री हो जाएंगे तो फिर वे अपने हिसाब से राजकाज चलाएंगे।

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