महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस शनिवार को दिल्ली आए। यह संयोग था कि शनिवार को ही धर्मेंद्र प्रधान का शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा हुआ और जंतर मंतर पर छात्रों और युवाओं का प्रदर्शन समाप्त हुआ। इसी बीच फड़नवीस के दिल्ली आने पर मीडिया और सोशल मीडिया में अचानक यह शोर उठ गया कि वे देश के नए शिक्षा मंत्री होने जा रहे हैं। हालांकि यह तत्काल संभव नहीं था क्योंकि किसी राज्य के मुख्यमंत्री को पद से हटाने का मामला ऐसे बिजली के स्विच दबाने जैसा नहीं होता है। दूसरे संसद सत्र के बीच में मंत्रिमंडल में कोई फेरबदल नहीं होने वाली थी, यह भी सबको अंदाजा था। फिर भी फड़नवीस को लेकर खबरें फैलीं तो बताया जा रहा है कि उसके पीछे उनके विरोधियों का हाथ था। उनके विरोधियों में दिल्ली के भी हैं, महाराष्ट्र के भी हैं और भाजपा के भी हैं तो भाजपा विरोधी पार्टियों के भी हैं।
कहा जा रहा है कि उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के कुछ समर्थकों ने यह हल्ला उठाया कि फड़नवीस की महाराष्ट्र से विदाई हो रही है। दिल्ली में कई लोगों को यह बात अच्छी लगी। हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि दिल्ली से ही मैसेज गया था कि इस तरह का प्रचार हो। इसके बाद उद्धव ठाकरे की शिव सेना के नेता संजय राउत ने इसे और बड़ा मुद्दा बना दिया। बाद में खबरें थम गईं। फिर भी सवाल बना रहा कि वे किसलिए दिल्ली आए थे और क्या उनको खासतौर से बुलाया गया था? कहा जा रहा है कि कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके को लेकर कुछ बात है, जिसमें उनकी भूमिका हो सकती है। नया शिक्षा मंत्री कौन होगा, इसको लेकर अटकलें लग रही हैं। डॉक्टर जितेंद्र सिंह सबसे आगे बताए जा रहे हैं।
