महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे क्या नाराज हैं? 2024 के नवंबर में राज्य में नई सरकार बनने के बाद से ही शिंदे की नाराजगी की कथा चल रही है। शिंदे के एक जानकार नेता का कहना है कि 2024 की जीत का श्रेय एकनाथ शिंदे को मिलना चाहिए। शिंदे खुद भी मानते हैं कि उनके नेतृत्व वाली सरकार ने दूसरी पार्टियों की तमाम आपत्तियों को दरकिनार करके माझी लड़की बहिन योजना शुरू की थी और चुनाव से ठीक पहले एक साथ तीन महीने की किश्त जमा कराई थी। इसका पार्टी को लाभ मिला। शिंदे के समर्थक अनौपचारिक बातचीत में कह रहे हैं कि 2024 के मई में जो लोकसभा चुनाव भाजपा और पूरी महायुति हार गई थी। वह तो नवंबर में शिंदे की योजना ने गठबंधन को बचाया।
इस आधार पर शिंदे अपने को मुख्यमंत्री पद का स्वाभाविक दावेदार मानते हैं। लेकिन भाजपा ने उनको मुख्यमंत्री पद से हटा कर उप मुख्यमंत्री बना दिया। ऊपर से अब उनकी पार्टी के 13 सांसद हो गए हैं फिर भी केंद्र में एक ही मंत्री पद है। इसलिए वे गाहे बगाहे अपनी नाराजगी का इजहार करते रहते हैं। पिछले दिनों खबर आई कि वे मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस की अध्यक्षता में हो रही कैबिनेट बैठक छोड़ कर दिल्ली आ गए। हालांकि बाद में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट में शिव सेना के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर चल रहे मुकदमे के सिलसिले में वे दिल्ली आए थे। यह भी उनके सामने एक चुनौती है। वे शिव सेना का नाम और तीर धनुष चुनाव चिन्ह नहीं गंवा सकते हैं। उनको डर है कि कहीं रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी की तरह शिव सेना के दोनों धड़ों को नया नाम और नया चुनाव चिन्ह न मिले यानी तीर धनुष कहीं जब्त न हो जाए।
