उद्धव ठाकरे की पार्टी के राज्यसभा सांसद और प्रवक्ता संजय राउत ने दावा किया है कि भारतीय जनता पार्टी ने उनके सांसदों को खरीद लिया है। उन्होंने एक सांसद की कीमत 15 करोड़ रुपए बताई है। यह बात सही है या नहीं, इसकी पुष्टि नहीं की जा सकती है। कोई नहीं मानता है कि पशुओं की तरह सांसदों, विधायकों की खरीद फरोख्त होती है। लेकिन संजय राउत की बात को मानें तो उन्होंने खुद ही अपने सांसदों की कीमत कम कर दी। उन्होंने एक सांसद की कीमत 15 करोड़ बताई है, जबकि चार साल पहले जब शिव सेना टूटी थी और 40 से ज्यादा विधायक एकनाथ शिंदे के साथ गए थे तब एक विधायक की कीमत 50 खोखे यानी 50 करोड़ रुपए बताई गई थी। यानी महाराष्ट्र में नई सरकार बनाने के लिए विधायक ज्यादा कीमत में खरीदे गए थे और दिल्ली की सरकार का बहुमत बनाने के लिए सांसदो की कीमत कम लगाई जा रही है!
गौरतलब है कि उद्धव ठाकरे की पार्टी की छह से सात सांसद पाला बदल रहे हैं। सोचें, चार दिन पहले उद्धव ठाकरे ने मातोश्री में बैठक बुलाई तो पांच सांसद मौजूद थे। कुछ सांसदों के ऑनलाइन जुड़ने की खबर भी थी। लेकिन साथ बैठने और अलग नहीं होने का संकल्प जताने के दो दिन बाद ही सांसदों के फोन स्विच ऑफ हो गए और वे गायब हो गए। इसके बाद सांसद दिल्ली पहुंचे और उनके पीछे उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे भी दिल्ली पहुंचे। उद्धव के बागी सांसदों को शिंदे अपनी पार्टी में शामिल करना चाहते हैं। इस बीच संजय राउत ने कीमत के अलावा जो बात कही है वह भविष्य की राजनीति का संकेत है। उन्होंने कहा कि हमारा समय आएगा तो हम भी दिखाएंगे कि पार्टी कैसे तोड़ी जाती है। यानी अब दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र पार्टियों को तोड़ने का तंत्र बन रहा है।
