ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक से ममता बनर्जी को सीखना चाहिए। 79 साल के नवीन पटनायक नए सिरे से शक्ति संचित कर रहे हैं और अपनी पार्टी को बचाने के साथ साथ उसे राजनीतिक रूप से प्रासंगिक बनाने की कोशिश कर रहे हैं। गौरतलब है कि 2024 के चुनाव के बाद उनकी पार्टी में भी बिखराव हुआ है। हालांकि वैसा नहीं हुआ, जैसा ममता बनर्जी की पार्टी में हो रहा है। इसका कारण यह था कि ओडिशा के लोगों ने भले नवीन बाबू को हरा दिया था लेकिन लोग उनसे या उनकी पार्टी के दूसरे नेताओं से नफरत नहीं करते थे। कई जगह तो लोगों ने चुनाव नतीजों के बाद अफसोस जताया और कहा गया कि दोबारा चुनाव हो जाए तो फिर बीजू जनता दल जीत जाए। बहरहाल, पता नहीं तीन साल बाद होने वाले चुनाव में क्या होगा लेकिन उससे पहले नवीन पटनायक पूरी ताकत से सक्रिय हो गए हैं।
नवीन पटनायक ने अपने नेताओं के साथ बैठक की है। पहले तो वे अपने विधायकों से मिले। लेकिन उसके बाद वे विधानसभा और लोकसभा चुनाव में हारे हुए अपने प्रत्याशियों के साथ मिले। करीब तीन घंटे तक उन्होंने सैकड़ों लोगों के साथ बैठक की। आमतौर पर पहले की बैठकों में नवीन पटनायक बोलते थे और बाकी नेता सुनते थे। निर्देश लेकर क्षेत्र में जाते थे। लेकिन इस बार की बैठक अलग थी। इस बार नवीन पटनायक ने सबको बोलने दिया और खुद सुनते रहे। किसी ने उनसे सवाल पूछा तो उसका जवाब भी दिया। इसके बाद बताया कि वे सभी विधानसभा क्षेत्रों की यात्रा पर निकलेंगे। इससे उनकी पार्टी के नेताओं में उम्मीद लौटी है। ममता बनर्जी को उनसे सीखना चाहिए। अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को आगे करने की बजाय खुद अगर ममता फिर से सड़क पर उतरें और उससे पहले अपने जीते व हारे नेताओं के साथ बैठक करके उनको भरोसा दिलाएं तो कुछ हद तक हालात संभाल सकती हैं।
