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मंदिर आंदोलन वाले चुनाव लड़ेंगे

भारतीय जनता पार्टी में अप्रासंगिक मान लिए गए और हाशिए में डाल दिए गए कई नेता फिर से ताल ठोक रहे हैं। इनमें अयोध्या के राम मंदिर आंदोलन से जुड़े नेता भी हैं। भाजपा के पुराने नेता विनय कटियार ने ऐलान किया है कि वे अगले साल विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे और वह भी अयोध्या से। ध्यान रहे विनय कटियार पिछड़ी जाति से आते हैं और हिंदुत्व का बड़ा चेहरा रहे हैं। मंदिर आंदोलन के समय वे अग्रिम पंक्ति में थे। फैजाबाद लोकसभा सीट पर भाजपा के हारने के बाद से वे सक्रिय हुए हैं। उनके करीबी लोगों का कहना है कि मंदिर निर्माण और उसके उद्घाटन की पूरी प्रक्रिया में उनकी जिस तरह स अनदेखी हुई उससे वे आहत भी हैं। सो, 70 साल के विनय कटियार ने 2027 में अयोध्या की सीट से विधानसभा का चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। वे फैजाबाद से तीन बार लोकसभा सांसद रहे हैं और दो बार राज्यसभा सांसद भी रहे हैं। उनके चुनाव लड़ने का ऐलान भाजपा नेतृत्व को पसंद नहीं आ रहा होगा।

उन्हीं की तरह मंदिर आंदोलन का बड़ा चेहरा रहीं उमा भारती ने भी चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने 2019 में उत्तर प्रदेश की झांसी सीट से लोकसभा का चुनाव जीता था और केंद्र में मंत्री बनी थीं। लेकिन 2019 में वे चुनाव नहीं लड़ीं और 2024 में भी चुनाव से दूर रहीं। उस समय सेहत वगैरह की कुछ बात आई थी लेकिन यह स्पष्ट नहीं हुआ कि वे क्यों नहीं लड़ीं। लेकिन अब फिर वे चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही हैं। वे गाय और गंगा के मुद्दे पर चुनाव लड़ेंगी। उमा भारती ने यह भी कहा है कि वे झांसी से ही लड़ेंगी। उन्होंने राजनीतिक गतिविधियां भी बढ़ा दी हैं। पिछले दिनों इंदौर में दूषित पानी से हुई लोगों की मौतों पर उन्होंने अपनी ही पार्टी की सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उमा भारती ने मुआवजे पर तंज करते हुए कहा कि जान की कीमत दो लाख रुपए नहीं होती है। विनय कटियार और उमा भारती के साथ ही मंदिर आंदोलन का चेहरा रहे प्रवीण तोगड़िया भी सक्रिय हो गए हैं। वे देश के दौरा कर रहे हैं और लव जिहाद का मुद्दा बना रहे हैं। उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण कानून की मांग भी की है। वे चुनाव नहीं लड़ेंगे लेकिन उनकी सक्रियता भी उस समय के नेताओं को एकजुट करेगी।

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