देश की नौजवान पीढ़ी जब सड़कों पर उतरी तो उनकी बगावत से कोई भी घर या परिवार अछूता नहीं रहा। यहां तक कि जिन पुलिसकर्मियों को आंदोलनकारियों से निपटने के लिए भेजा गया उनके बच्चे भी आंदोलन में शामिल थे। भाजपा नेताओं का परिवार भी इससे बचा नहीं है। भाजपा और उसकी सहयोगी पार्टियों के नेताओं के परिवारों में भी किशोरों और युवाओं ने बगावत का झंडा बुलंद किया। आंदोलन के दौरान ये युवा जंतर मंतर पर पहुंचे या सोशल मीडिया में आंदोलन को सपोर्ट किया। इससे एक नया विवाद शुरू हो गया है। भाजपा नेताओं के बच्चों को स्थानीय राजनीति से भी जोड़ कर देखा जा रहा है और राज्यों में भाजपा के नेता इस पर सवाल उठा रहे हैं। असम में भाजपा की सहयोगी असम गण परिषद के सांसद और राज्य सरकार के मंत्री केशव महंत की बेटी ने आंदोलनकारियों का समर्थन किया। इसके लिए उस युवती को ट्रोल किया जाने लगा। बाद में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने ट्रोलिंग करने वालों को फटकार लगाई औऱ कहा कि जरूरी नहीं है कि बच्चे अपने पिता की विचारधारा का ही पालन करें।
हालांकि ओडिशा में मुख्यमंत्री ने ऐसा नहीं कहा और नतीजा यह हुआ है कि भुवनेश्वर से भाजपा की सांसद अपराजिता सारंगी की बेटी अर्चिता भाजपा नेताओं के ही निशाने पर हैं। उन्होंने सोशल मीडिया में पोस्ट डाल कर आंदोलनकारियों का समर्थन किया था और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का समर्थन किया था। अर्चिता ने लिखा था कि उनका परिवार प्रधान के साथ है लेकिन वे प्रदर्शनकारियों के पक्ष में हैं। इसे स्थानीय राजनीति से जोड़ा जा रहा है। प्रदेश भाजपा के नेता अपराजिता सारंगी की भी आलोचना कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश के भाजपा नेता और पूर्व विधायक विक्रम सिंह की बेटी यशस्विनी राजे ने भी प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस की बेटी ने हिंसा का विरोध किया लेकिन परीक्षा की व्यवस्था में सुधार के लिए युवाओं के आंदोलन का समर्थन किया। यह भी दिलचस्प है कि भाजपा के किसी नेता के बेटे के बारे में खबर नहीं आ रही है। सिर्फ बेटियां आंदोलनकारियों का साथ दे रही हैं।
