मानसून सत्र की तैयारियों के सिलसिले में भाजपा बहुत आक्रामक तरीके से लगी है। खबर है कि समाजवादी पार्टी के साथ भी भाजपा की बात हुई है। जानकार सूत्रों के मुताबिक मंगलवार की देर रात को सपा के कुछ नेताओं से केंद्र सरकार के मंत्रियों की बात हुई है। तीन बड़े मंत्रियों को इस काम में लगाए जाने की खबर है। करीब 20 दिन के विदेश दौरे के बाद लौटे राहुल गांधी को इस क्राइसिस की खबर है। लेकिन वे सपा से बात नहीं कर रहे हैं। कांग्रेस के बड़े नेता दो दिन पहले तक कह रहे थे कि सपा पर उनको भरोसा है। लेकिन मंगलवार रात के घटनाक्रम के बाद उनकी चिंता बढ़ी है। तभी कांग्रेस बुधवार को सक्रिय हुई है।
ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस के प्रयास कामयाब नहीं होंगे। असल में जिस तरह से भाजपा ने डीएमके को समझाया है कि अगर परिसीमन के मौजूदा बिल पर उसने समर्थन नहीं दिया तो जनसंख्या आधारित परिसीमन होगा, जिसको तमिलनाडु को नुकसान होगा। वैसे ही सपा को समझाया गया है कि अगर उसने परिसीमन का विरोध किया तो यह प्रचार होगा कि सपा ने उत्तर प्रदेश के सांसदों की संख्या 80 से बढ़ा कर 120 करने के प्रस्ताव का विरोध किया। यह भी कहा जा रहा है कि अगर पार्टी के तौर पर सपा के नेता सरकार का साथ देने को तैयार नहीं होते हैं तो दूसरा रास्ता यह निकाला जा सकता है कि उनके कुछ सांसद गैरहाजिर हो जाएं। इसके लिए निजी तौर पर सांसदों को तैयार किया जा सकता है। ध्यान रहे पिछली बार भी चुनाव के कारण ममता बनर्जी के सात सांसद गैरहाजिर रहे थे। बहरहाल, भाजपा नेता पूरे भरोसे में हैं कि सपा को लेकर कोई न कोई रास्ता जरूर निकलेगा।
