एक तरफ भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल में अपने घोषणापत्र में वादा किया है कि उसकी सरकार बनी तो महिलाओं को हर महीने तीन तीन हजार रुपए देगी। दूसरी ओर महाराष्ट्र सरकार मुख्यमंत्री माझी लड़की बहिन योजना का पैसा देने में इतना परेशान हो गई है कि बाकी योजनाओं के लिए पैसे नहीं बच रहे हैं। पिछले दिनों बॉम्बे हाई कोर्ट ने इसे लेकर तीखी टिप्पणी की। हाई कोर्ट ने कहा कि अगर सरकार के पास कर्मचारी को वेतन और पेशन देने के लिए पैसा नहीं है तो उसे लड़की बहिन योजना बंद कर देनी चाहिए।
असल में एक शिक्षिका ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी कि उसे बार बार अनुरोध करने के बावजूद सातवें वेतन आयोग के हिसाब से पेंशन नहीं मिल रही है। इसी पर नाराज हाई कोर्ट ने सरकार से कहा है कि अगर वेतन और पेंशन देने के पैसे नहीं हैं कि लड़की बहिन योजना बंद कर दें। हाई कोर्ट ने कहा कि सरकार की प्राथमिकताएं स्पष्ट होनी चाहिए। निश्चित रूप से सरकार की प्राथमिकता अपने कर्मचारियों को वेतन और पेंशन देने की होनी चाहिए। लेकिन सरकारें आजकल चुनाव जीतने को प्राथमिकता दे रही हैं। इसलिए मुफ्त की वस्तुएं व सेवाएं बांटने या नकद रुपए बांटने पर ज्यादा ध्यान रहता है। बहरहाल, बॉम्बे हाई कोर्ट की टिप्पणी को आधार बना कर सरकारों और राजनीतिक दलों को इस तरह की योजनाओं पर पुनर्विचार करना चाहिए।
