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लेफ्ट के नए नेता निकल रहे हैं

जैसा हर राजनीतिक आंदोलन में होता है इस समय मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे आंदोलन से भी नए नेता निकल रहे हैं। इससे ठीक पहले हुए इंडिया अगेंस्ट करप्शन के आंदोलन से अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया सहित आम आदमी पार्टी का पूरा नेतृत्व निकला। आप के अलावा दूसरी पार्टियों को भी नए नेता मिले। जेपी के आंदोलन से तो समाजवादी नेताओं की एक पूरी पीढ़ी निकली थी। मुलायम सिंह से लेकर लालू प्रसाद, नीतीश कुमार, रामविलास पासवान आदि का नेतृत्व उसी समय स्थापित हुआ।

इस बार के आंदोलन से भी नया नेतृत्व निकल रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी के नेता कितने स्थापित होंगे यह नहीं कहा जा सकता है क्योंकि उनमें प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के अलावा कोई और योग्यता नहीं दिख रही है। लेकिन लेफ्ट पार्टियों को जरूर नए नेता मिल रहे हैं। ध्यान रहे लगातार चुनावी हार और पश्चिम बंगाल, केरल व त्रिपुरा तीनों राज्यों की सरकार से बाहर होने के बाद लेफ्ट के सामने बड़ा संकट है। तभी यह प्रदर्शन उनके लिए वरदान की तरह साबित हो रहा है।

सीपीआई माले के छात्र संगठन आइसा की नेता नेहा बोरा अखिल भारतीय स्तर पर लेफ्ट का चेहरा बनी हैं। उनका एक लड़ाकू चेहरा आज कल हर जगह दिख रहा है लेकिन इससे पहले जून और जुलाई के प्रदर्शन के दौरान उन्होंने 20 दिन तक भूख हड़ताल की थी। उनको असली वैधता और ताकत उस भूख हड़ताल से मिली। तभी बिहार से लेकर झारखंड तक हर जगह छात्र अपने को नेहा बोरा के साथ जोड़ रहे हैं। इसी तरह सीपीएम के छात्र संगठन एसएफआई की पुझाक्कल पवित्रा का चेहरा उभरा है। एसएफआई का झंडा लेकर भागते हुए उनकी तस्वीर वायरल हुई है। सीपीआई का अभी स्ट्रगल है। कन्हैया कुमार के धोखे के बाद पार्टी का छात्र संगठन एआईएसएफ अभी तक सदमे से नहीं उबर पाया है।

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