Naya India-Hindi News, Latest Hindi News, Breaking News, Hindi Samachar

अगले साल के चुनाव कांग्रेस के लिए अहम

इस साल पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव भाजपा के लिए बहुत अहम थे। यह अलग बात है कि तमिलनाडु और केरल में भाजपा का कुछ भी दांव पर नहीं था। लेकिन पश्चिम बंगाल का चुनाव अकेले इतना महत्वपूर्ण था कि उसका वजन बाकी चार चुनावों पर भारी था। फिर असम का भी चुनाव था, जहां 10 साल सरकार चलाने के बाद भाजपा को जनादेश हासिल करना था। अगले साल का चुनाव भी भाजपा के लिए बहुत अहम होगा क्योंकि उत्तर प्रदेश और गुजरात दोनों राज्यों में चुनाव है।

उत्तर प्रदेश में लगातार दो बार से भाजपा जीत रही है लेकिन दूसरी बार उसकी सीटों में बड़ी गिरावट आई थी। इसी तरह पिछले तीन लोकसभा चुनावों में उसकी सीटें घटी हैं। 2024 में तो उसे बड़ा नुकसान हुआ। उसके बाद 2027 का चुनाव ज्यादा अहम हो गया है। अगले साल के चुनावों की खास बात यह है कि ये चुनाव भाजपा के लिए भी बहुत अहम हैं और इसका कारण कारण यह है कि उत्तर प्रदेश छोड़ कर बाकी सभी राज्यों में भाजपा एक बड़ी ताकत है और वह लड़ाई की एक धुरी रहेगी।

अगले साल मार्च में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में चुनाव है, जबकि नवंबर में हिमाचल प्रदेश और गुजरात में चुनाव है। इन सात राज्यों में से छह में कांग्रेस एक बड़ी ताकत है और कांग्रेस के नेता हिमाचल प्रदेश में अपनी सत्ता बचाने के साथ साथ चार और राज्यों में सत्ता हासिल करने की उम्मीद कर रहे हैं। यह बड़ी उम्मीद है लेकिन कांग्रेस को अपने पिछले प्रदर्शनों और राज्यों में संगठन की स्थिति को देखते हुए लग रहा है कि वह इस लक्ष्य को हासिल कर लेगी। तभी कांग्रेस ने अगले साल के चुनावों की तैयारी शुरू कर दी है। उत्तर प्रदेश में भी कांग्रेस जोर लगाएगी और समाजवादी पार्टी के साथ अलायंस में लड़ेगी। लेकिन वह हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में करो या मरो के अंदाज में लड़ेगी। इन राज्यों को लेकर कांग्रेस को सकारात्मक फीडबैक भी मिल रही है।

कांग्रेस के जानकार नेताओं का कहना है कि हिमचाल प्रदेश में इस साल सरकार के चार साल पूरे होंगे और शुरुआती झटके के बाद पार्टी ने अपने संभाल लिया है। कांग्रेस के आधा दर्जन विधायक पार्टी छोड़ कर गए थे, जिनकी वजह से कांग्रेस के अभिषेक सिंघली राज्यसभा का चुनाव हार गए थे। लेकिन उसके बाद उपचुनाव कांग्रेस के लगभग सभी बागी भाजपा की टिकट से लड़ कर हार गए। आर्थिक परेशानियों के बावजूद सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर नहीं है। दूसरी ओर भाजपा में गुटबाजी बढ़ी हुई है। उत्तराखंड में भी भाजपा में गुटबाजी है और 10 साल के शासन की एंटी इन्कम्बैंसी है। हालांकि कांग्रेस की मुश्किल यह है कि वहां हरीश रावत की उम्र बहुत हो गई है और उनके बाद कोई नया करिश्माई चेहरा सामने नहीं आया है।

पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार है लेकिन विधानसभा चुनाव में सभी पार्टियों को कांग्रेस से लड़ना होगा। वहां कांग्रेस का संगठन मजबूत है और नेता भी उसके पास हैं। राजा अमरिंदर वारिंग से लेकर चरणजीत सिंह चन्नी और सुखजिंदर रंधावा जैसे अच्छे नेता हैं। गोवा में कांग्रेस ने 2017 में सबसे ज्यादा सीटें जीती थीं लेकिन आंतरिक झगड़े और प्रभारी के समय पर फैसला नहीं करने से उसकी सरकार नहीं बन पाई थी। उसके बाद उसकी स्थिति कमजोर हुई है। लेकिन भाजपा सरकार के खिलाफ 10 साल की एंटी इन्कम्बैंसी से कांग्रेस को उम्मीद है। ऐसे ही मणिपुर में दोनों लोकसभा सीटें कांग्रेस ने जीती थी और वहां के हालात को देखते हुए कांग्रेस को लग रहा है कि पूर्वोत्तर में उसकी वापसी मणिपुर से शुरू हो सकती है। गुजरात से कांग्रेस को ज्यादा उम्मीद नहीं है।

Exit mobile version