आखिरकार नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार बिहार की सम्राट चौधरी सरकार में शामिल हुए। निशांत को लेकर ऊहापोह की स्थिति कई महीने से बनी हुई थी। पिछले महीने जब सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली तब भी निशांत का नाम तय हो गया था। लेकिन ऐन मौके पर नीतीश कुमार ने इस पर सहमति नहीं दी। जानकार सूत्रों का कहना है कि निशांत उप मुख्यमंत्री बनने के लिए तैयार थे। उन्होंने सहमति दे दी थी। पहले जरूर वे चाहते थे कि नीतीश अभी छह महीने और मुख्यमंत्री रहें और इस बीच वे राजनीतिक अनुभव लेंगे, पार्टी का काम करेंगे। लेकिन बाद में वे तैयार हो गए। लेकिन परिवार के लोगों की एक मीटिंग में नीतीश ने कहा कि जब वे खुद हैं तो निशांत को सरकार में शामिल होने की जरुरत नहीं है।
इसके बाद बताया जा रहा है कि परिवार के अदंर बहुत तनाव रहा। ध्यान रहे इन दिनों नीतीश कुमार के आसपास उनके परिवार के बहुत सारे लोग रहते हैं। उनके ससुराल पक्ष के लोग उनकी देखभाल करते हैं। वे सभी लोग चाहते थे कि निशांत को उप मुख्यमंत्री बनाया जाए। दूसरी ओर नीतीश अड़े हुए थे कि अभी नहीं बनाया जाएगा। पिछले 20 दिन में इसे लेकर बहुत माथापच्ची हुई। परिवार के लोगों ने समझाया कि जब निशांत राजनीति में आ ही गए हैं और राजनीतिक यात्रा कर रहे हैं तो सरकार में शामिल होने में दिक्कत नहीं होनी चाहिए। साथ ही यह भी समझाया गया कि निशांत के सरकार में नहीं शामिल होने के कारण नालंदा में और कुर्मी समाज में खींचतान शुरू हो गई है। श्रवण कुमार को लोग नेता मानने को तैयार नहीं हैं। भाजपा भी नया कुर्मी नेतृत्व आगे कर रही है। यह सब समझाने के बाद नीतीश ने अपने बेटे के नाम पर हामी भरी।
