भारतीय जनता पार्टी के संगठन में राम माधव की वापसी एक बड़ा घटनाक्रम है। पहले तो उनको महामंत्री बनाए जाने की चर्चा थी लेकिन वे उपाध्यक्ष बनाए गए हैं। गौरतलब है कि राम माधव पार्टी के महासचिव रहे हैं और उससे पहले राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के प्रवक्ता थे। नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद उनका खास महत्व रहा। जम्मू कश्मीर से लेकर पूर्वोत्तर तक उन्होंने कई अहम भूमिकाएं निभाईं। लेकिन अचानक उनको हाशिए में डाल दिया गया था। पिछले दिनों उनकी वापसी हुई और वे ग्रेटर बेंगलुरू नगर निगम चुनाव के प्रभारी बनाए गए। अब उनको उपाध्यक्ष बनाया गया है। इसे भाजपा संगठन में आरएसएस के बढ़ते असर के रूप में भी देखा जा रहा है। हालांकि वे प्रधानमंत्री मोदी के करीब हैं और उनकी विदेश यात्राओं में बड़ी भूमिका निभाते रहे हैं। पिछले दिनों उन्होंने एक कार्यक्रम में अमेरिका में कह दिया था कि अमेरिका के दबाव में भारत ने रूस से तेल खरीदना कम कर दिया है। बाद में उन्होंने इस पर माफी मांगी। लेकिन इस घटनाक्रम से उनका ग्राफ थोड़ा कम हुआ।
राम माधव की तरह ही स्मृति ईरानी की भी भाजपा संगठन में वापसी हुई है। वे भाजपा की महिला मोर्चा की अध्यक्ष रही हैं और पार्टी की फायर ब्रांड प्रवक्ता रही हैं। लेकिन 2024 में लोकसभा का चुनाव हारने के बाद उनको न तो मंत्रिमंडल में लिया गया, न राज्यसभा भेजा गया और न कोई जिम्मेदारी मिली थी। लेकिन पश्चिम बंगाल विधानसभा के चुनाव प्रचार में उन्होंने जो मेहनत की उससे उनको वापसी का मौका मिला है। इसी तरह सौदान सिंह को फिर से संयुक्त संगठन महामंत्री बनाया गया है। उनको कुछ समय पहले पार्टी का उपाध्यक्ष बना कर हाशिए में डाल दिया गया है। अब एक बार फिर वे शिव प्रकाश के साथ संयुक्त संगठन महामंत्री के रूप में काम करेंगे। काफी समय के बाद पीयूष गोयल फिर से संगठन में लौटे हैं। उनको वापस कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वसुंधरा राजे, वैजयंत जय पांडा और डी पुरंदेश्वरी जैसे पुराने चेहरों को भी नितिन नबीन की टीम में बनाए रखा गया है। यह भी कहा जा रहा है कि पार्टी संगठन के कामकाज का ज्यादा जिम्मा ऐसे ही लोगों के पास होगा। बाकी तो भर्ती के लिए रखे गए हैं।
