Naya India-Hindi News, Latest Hindi News, Breaking News, Hindi Samachar

देखा देखी रंग बदल रहे हैं राज्यपाल

जैसे खऱबूजे को देख कर खरबूजा रंग बदलता है वैसे ही राज्यपाल रंग बदल रहे हैं। राज्यपालों का इस साल का रंग विपक्षी पार्टियों के शासन वाले राज्यों में अभिभाषण नहीं पढ़ने का है। एकाध अपवाद को छोड़ कर विपक्षी शासन वाले सभी राज्यों में राज्यपालों ने अभिभाषण नहीं पढ़ा या दो चार लाइन पढ़ कर छोड़ दिया। पहले कभी ऐसा अपवाद के तौर पर होने की बात सुनी गई थी। अब यह मुख्यधारा की बात हो गई है। आजादी के बाद से ही सबको पता है कि राजभवनों में बैठे राज्यपाल राजनीतिक व्यक्ति होते हैं और केंद्र सरकार के एजेंट के तौर पर काम करते हैं। फिर भी राज्यपाल इसमें एक परदा रखते थे। थोड़ा मर्यादा और नैतिकता का निर्वाह करते हुए कम से कम तटस्थता दिखाने की कोशिश जरूर करते थे।

लेकिन अब राज्यपाल ने वह शर्म, लिहाज, नैतिकता आदि का चोला पूरी तरह से उतार दिया है। तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि ने विधानसभा के साल के पहले सत्र में अभिभाषण नहीं पढ़ा। उनकी देखा देखी केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने भी नहीं पढ़ा। उनकी देखा देखी कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने भी पूरा अभिभाषण पढ़ने से इनकार कर दिया। अब हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने भी दो चार लाइन पढ़ कर अभिभाषण छोड़ दिया। अभिभाषण में जैसे ही संवैधानिक संस्थाओं की बात आई उन्होंने उसे छोड़ दिया और सदन से निकल गए। राज्यपाल को सरकार की ओर से लिखा गया अभिभाषण पढ़ना होता है। यह उसका संवैधानिक दायित्व है। लेकिन राज्यपालों ने इसे तमाशा बना दिया है। जहां भाजपा की सरकार है वहां अभिभाषण अक्षरशः पढ़ेंगे लेकिन जहां भाजपा विरोधी पार्टी की सरकार है वहां यही तमाशा चलेगा।

Exit mobile version