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पैंगोंग इलाके में चीन का पुल

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चीन ने भारत के लद्दाख क्षेत्र की पैंगोंग झील पर 400 मीटर लंबे पुल का निर्माण लिया है। सेटेलाइट इमेज के अनुसार पुल पर चीन के हल्के मोटर वाहन चल रहे हैं। जाहिर है इससे चीन को ‘रणनीतिक बढ़त’ मिलेगी क्योंकि इससे चीनी सैनिको को पैंगोंग झील के उत्तरी और दक्षिणी किनारों के बीच तेजी से आना-जाना होगा।

इससे यह भी आंशका सही साबित होती है कि चीन और उसकी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी लगातार भारत को क्षेत्र में नई यथास्थिति को स्वीकार करने के लिए मजबूर कर रही है। इस मामले पर सामरिक रणनीतिकारों ने अपनी चिंता जाहिर की है। बताया है कि यह भारत के लिए बेहद चिंता का विषय है। यह पुल चीन की अग्रिम और पीछे दूर तक की फोर्स के बीच संपर्क बढ़ाएगा। इससे भारत के खिलाफ अपने क्षेत्रीय दावों को मजबूत करने की बीजिंग की प्रतिबद्धता प्रकट होती है।

भारत और चीन के बीच मई 2020 से पूर्वी लद्दाख में सीमा पर गतिरोध बना हुआ है और पैंगोंग झील उन कई टकराव बिंदुओं में से एक है जहां पीएलए का उल्लंघन है। ध्यान रहे मई 2020 की शुरुआत में, भारतीय और चीनी सैनिकों ने पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर हिंसक झड़पे हुई थी। तब पैंगोंग झील के उत्तर में स्थित गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प में 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे। “रिपोर्टों से पता चलता है कि पुल भारी सैन्य उपकरणों, जैसे टैंक और बख्तरबंद कर्मियों की आवाजाही में समर्थ है। चीनी सेना ने पूर्वी लद्दाख में अतिक्रमण के कई बिंदुओं पर अपनी चौकियां मजबूत कर ली हैं।

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने मंगलवार को एक पोस्ट में कहा- चीन ने एक पुल बनाया है जो पैंगोंग झील के उत्तर और दक्षिण तटों को जोड़ता है। भारत के लिए इसके गंभीर रणनीतिक परिणाम होंगे क्योंकि यह चीन को झील के एक किनारे से दूसरे किनारे तक सैनिकों की जल्दी से आवाजाही संभव बनाएगा। इससे पैंगोंग झील क्षेत्र में चीन को रणनीतिक दबदबा बनेगा।

ध्यान रहे पैंगोंग झील के पास चीन द्वारा बनाए जा रहे नए पुल की खबरें जनवरी 2022 में सामने आईं थी। भारतीय विदे्श मंत्रालय ने तब कहा था कि पुल का निर्माण उन इलाकों में किया जा रहा है जो करीब 60 वर्षों से चीन के अवैध कब्जे में हैं। हालांकि भारत ने कभी इस अवैध कब्जे को स्वीकार नहीं किया है। भारत के रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने मंगलवार को नए पुल पर टिप्पणी करने से इंकार कर दिया। प्रधानमंत्री मोदी के ‘घुसपैठ नहीं’ के दावे बाद 6 जून 2020 से अब तक दोनों सेनाओं के बीच 21 दौर की सैन्य वार्ता हो चुकी है और कोई 270 घंटे चर्चा हुई बताते है। लेकिन चीन अपने इरादे अनुसार काम करता हुआ है।

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