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इस बार नहीं लडे पीके तो मुश्किल है

जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट से उपचुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। यह सीट पारंपरिक रूप से भाजपा की सीट रही है और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन उस सीट से जीते थे। नितिन नबीन राज्यसभा भेजे गए तो उनके इस्तीफे से यह सीट खाली हुई है। इस लिहाज से यह सीट भाजपा के लिए बहुत प्रतिष्ठा वाली है। प्रशांत किशोर ने पिछले साल नवंबर में हुए विधानसभा चुनाव के समय राघोपुर सीट से तेजस्वी यादव के खिलाफ लड़ने का ऐलान किया था। लेकिन ऐन मौके पर वे पीछे हट गए थे। इस भी उन्होंने अभी तक बांकीपुर से लड़ने की आधिकारिक घोषणा नहीं की है लेकिन उनकी पार्टी की ओर से हाइप पूरी बना दी गई है।

प्रशांत किशोर के बांकीपुर से लड़ने की चर्चा दूसरी पार्टियों ने नहीं शुरू कराई है। यह चर्चा खुद प्रशांत किशोर ने कराई है। उनकी पार्टी के नेता चाहते हैं कि अगर प्रशांत लड़ते हैं तो राजद और कांग्रेस अपना उम्मीदवार नहीं देकर उनको समर्थन करें। ऐसे में विपक्ष के साझा उम्मीदवार हो सकते हैं। हालांकि राजद ने आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा है। अगर प्रशांत किशोर लड़ते हैं और साझा उम्मीदवार के तौर पर जीत कर विधानसभा पहुंचते हैं तो उनकी राजनीति को वैधता मिलेगी और विधानसभा में विपक्ष की सबसे मुखर आवाज होंगे। इससे विपक्षी पार्टियां भी चिंतित हैं। लेकिन अगर ऐन मौके पर प्रशांत पीछे हटते हैं तो उनको बारे में निगेटिव धारणा बनेगी। वे क्षेत्र में घूम रहे हैं और अगर अभी से उम्मीदवारी का ऐलान करें तो बांकीपुर का चुनाव पूरे देश की दिलचस्पी का केंद्र बनेगा।

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