Naya India-Hindi News, Latest Hindi News, Breaking News, Hindi Samachar

सत्ता के लिए हर दिन शुभ है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने मंत्रिमंडल में फेरबदल के लिए किस बात का इंतजार कर रहे हैं? कई जानकार बता रहे हैं कि अभी शुभ समय नहीं है। कहा जा रहा है कि अभी अधिकमास या पुरुषोत्तम मास का समय चल रहा है। 17 मई से यह शुरू हुआ है और 15 जून तक चलेगा। इस आधार पर रहा जा रहा है कि मोदी 15 जून के बाद मंत्रिमंडल में फेरबदल करेंगे। 20 जून के आसपास की तारीख भी दी जा रही है। लेकिन क्या सचमुच ऐसा है? यह सही है कि देश का हर हिंदू इन बातों में बहुत मानता है। नेता, अभिनेता, खिलाड़ी, कारोबारी आदि तो कुछ ज्यादा ही मानते हैं। लेकिन क्या यह सही नहीं है कि हिंदू धर्म में हर चीज का निदान है? आपात स्थिति बन जाए तो क्या सारी मान्यताएं शिथिल करके फैसला नहीं किया जाता है? हिंदू धर्म को मानने वाला हर व्यक्ति यह कहता और मानता है कि राम और सीता का विवाह तो बड़े शुभ मुहूर्त में हुआ था और देवता भी आशीर्वाद देने पहुंचे थे फिर कैसे सीता को इतना कष्ट भोगना पड़ा?

राजनीति के संदर्भ में भी देखें तो इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है कि किस समय प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री शपथ लेते हैं और किस समय मंत्रिमंडल में फेरबदल होती है। झारखंड में मुख्यमंत्री मलमास या खरमास में शपथ लेते हैं। 15 दिसंबर से 14 जनवरी तक का समय, जो किसी भी शुभ काम के लिए अच्छा नहीं माना जाता है उसी अवधि में झारखंड के सीएम की शपथ होती है। मलमास में शपथ के बावजूद हेमंत सोरेन लगातार दूसरी बार जीते और ज्यादा बहुमत से जीते। देश में कम ही नेता होंगे, जो डीके शिवकुमार से ज्यादा धर्म, कर्म और ज्योतिष मानते होंगे। अपनी पार्टी के आलाकमान के अघोषित निर्देशों का उल्लंघन करके वे ऐसे धार्मिक कार्यक्रमों में भी जाते हैं, जहां भाजपा के शीर्ष नेताओं से उनकी मुलाकात होती है। कहा जाता है कि वे अपने ज्योतिष के पूछे बगैर घर से नहीं निकलते हैं और न गाड़ी में पैर रखते हैं। उनके पास कई ज्योतिष हैं, जिनमें से कुछ तो उनके साथ साथ चलते हैं। फिर भी वे इसी अधिकमास की अवधि में तीन जून को शपथ लेने जा रहे हैं। इसका अर्थ है कि उनके ज्योतिष ने कोई न कोई रास्ता निकाला होगा।

वैसे भी इंदिरा गांधी ने शुभ मुहूर्त देख कर ही शपथ ली थी फिर भी कार्यकाल के बीच ही उनकी हत्या हो गई थी और राजीव गांधी आपात स्थिति में बने तब भी अगले चुनाव में इतनी सीटें जीतीं, जितनी आज तक किसी ने नहीं जीती है। ऐसे अनेक उदाहरण दिए जा सकते हैं। इसलिए यह मान कर चलना चाहिए कि मलमास, अधिकमास आदि का इस्तेमाल जरूरी कामों को टालने के लिए बहाने के तौर पर किया जाता है। इसलिए मोदी के मंत्रिमंडल में बदलाव में हो रही देरी का कारण तो यह नहीं हो सकता है कि अभी शुभ समय नहीं है। इसका कारण कुछ और है। अगर यह कारण भी होता तो इसे टालने बहुत आसान था। अधिकमास का महीना शुरू होने से पहले यानी 17 मई से पहले ही मोदी चाहते तो बदलाव कर सकते थे। आखिर 11 मई तक पश्चिम बंगाल और असम में सरकार की शपथ हो गई थी। सो, मामला टाइमिंग का है। यह देखना होगा कि अधिकमास खत्म होते ही जून के मध्य में मंत्रिमंडल का विस्तार होता है या इसे और आगे बढ़ाया जाता है।

Exit mobile version