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क्लीन चिट की रिपोर्ट क्यों छिपाना है?

भारत अद्भुत विडम्बनाओं और विरोधाभासों का देश है। सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज जस्टिस जे चेलामेश्वर ने देश के सबसे अमीर कारोबारी मुकेश अंबानी के परिवार के निजी चिड़ियाघर वनतारा की जांच की रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में सौंपी है। इस निजी चिड़ियाघर को लेकर कई शिकायतें हो रही थीं और कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में पहुंची थीं। इन पर सर्वोच्च अदालत ने अगस्त में एक एसआईटी बनाई, जिसकी अध्यक्षता जस्टिस चेलामेश्वर को दी गई। चार सदस्यों की इस कमेटी ने 12 सितंबर को सीलबंद लिफाफे में अपनी रिपोर्ट सौंपी और 15 सितंबर को सर्वोच्च अदालत ने कहा कि जस्टिस चेलामेश्वर कमेटी ने वनतारा में कोई गड़बड़ी नहीं पाई है। यानी वनतारा को क्लीन चिट दे दी गई।

अदालत की यह कार्रवाई और फैसला कई मायने में अद्भुत है। अदालत ने कहा है कि वनतारा को लेकर बार बार इस तरह कि शिकायत करने से बचें लोग। यह भी कहा कि कहीं भी इसकी फिर शिकायत नहीं की जाए। इसके बाद यह भी कहा कि सीलबंद लिफाफे वाली रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जाएगी। ऐसा आदेश शायद ही कभी किसी मामले में आया होगा! इससे भी दिलचस्प यह है कि हाल के दिनों में सुप्रीम कोर्ट के जजों में पारदर्शिता को लेकर सबसे ज्यादा मुखर जस्टिस चेलामेश्वर रहे हैं। याद करें चार साल पहले नवंबर 2021 में कैसे जस्टिस चेलामेश्वर ने कॉलेजियम की बैठक में शामिल होने से इनकार कर दिया था कि  इसमें पारदर्शिता नहीं है।

उन्होंने तब के चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर को लिख कर कहा था कि कॉलेजियम की बैठकों में पारदर्शिता नहीं होती है इसलिए वे इसका हिस्सा नहीं बनना चाहते हैं। पारदर्शिता के ऐसे चैंपियन जज जस्टिस जे चेलामेश्वर ने एक निजी चिड़ियाघर की एसआईटी जांच की रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में दी है और इस बात को स्वीकार किया है कि रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होगी! आखिर उस रिपोर्ट में ऐसा क्या है, जो लोगों को नहीं जानना चाहिए? जब एसआईटी को कोई गड़बड़ी नहीं मिली हो गर्व के साथ अंबानी परिवार को भी यह रिपोर्ट सार्वजनिक करके सबका मुंह बंद कर देना चाहिए। लेकिन कितनी हैरानी की बात है कि क्लीन चिट की रिपोर्ट छिपाई जा रही है!

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