मुख्य चुनाव आय़ुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने का प्रदर्शन वैसे तो कॉकरोच जनता पार्टी के नाम से हो रहा है लेकिन असल में इस प्रदर्शन में उनका कुछ भी नहीं है। सारी तैयारी लेफ्ट और आम आदमी पार्टी के नेता कर रहे हैं। यह ध्यान रखने की जरुरत है कि इस बार का प्रदर्शन जून और जुलाई में हुए प्रदर्शन से बहुत अलग है। उस समय नीट पेपर लीक से प्रभावित 24 लाख छात्र और उनके परिवार के लोग आंदोलन से जुड़े थे और साथ ही हर परिवार की सहानुभूति उस आंदोलन के साथ थी। जो जंतर मंतर नहीं पहुंच रहा था उसका भी भावनात्मक जुड़ाव उस प्रदर्शन से था। इस बार का प्रदर्शन प्रभावित यानी पीड़ित पक्ष का नहीं है। यह थर्ड पार्टी प्रदर्शन है। पार्टियों द्वारा प्रायोजित है। इसमें ऐसा नहीं हो रहा है कि जिनके नाम कटे हैं वे लोग हजारों या लाखों की संख्या में सड़क पर उतर रहे हैं।
यह स्वंयस्फूर्त आंदोलन नहीं है। इसके लिए लोगों को मोबाइलाज करना पड़ रहा है। वह काम करने के लिए न तो अभिजीत दीपके और उनकी चार लोगों की टीम के पास कोई संगठन है और न कोई सलाहियात हैं। पता नहीं है कि उनको ऑनलाइन या दूसरे माध्यम से कितना पैसा मिला है। लेकिन यह पता है कि उनके पास कोई संगठन नहीं है। जबकि प्रोटेस्ट मोबिलाइज करना बहुत मुश्किल काम होता है वह भी तब जब मुद्दा सीधे आम लोगों को प्रभावित करने वाला नहीं हो। यह काम आम आदमी पार्टी और लेफ्ट पार्टियां कर रही हैं। राजधानी दिल्ली में भी लेफ्ट पार्टियों के छात्र संगठनों के पास बड़ा कैडर है और आप के पास संसाधन है। आप को चार महीने में पंजाब और गोवा का चुनाव भी लड़ना है। इसलिए आप और लेफ्ट अपने संगठन और संसाधन से लोगों को मोबिलाइज कर रहे हैं और सीजेपी को उसका श्रेय मिल रहा है।
