राहुल गांधी ने देर से शुरू किया है लेकिन दुरुस्त शुरू किया है। वे छात्रों के मुद्दों को लेकर सड़क पर उतरने वाले हैं। तीन दिन पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ बैठक हुई थी, जिसमें कांग्रेस के सभी महासचिव और प्रभारी वगैरह शामिल हुए थे। उसमें इसकी योजना बनी थी। राहुल सबसे पहले 17 जून को राजस्थान के कोटा जाएंगे, जहां छात्रों से मिलेंगे और नीट यूजी परीक्षा के पेपरलीक का मुद्दा उठाएंगे। इसके बाद राहुल 10 जुलाई को प्रयागराज, 11 जुलाई को पटना और 14 जुलाई को दिल्ली में छात्रों से मिलेंगे। कांग्रेस ने इसे छात्र सम्मेलन का नाम दिया है। भाजपा की ओर से इसका विरोध इस आधार पर किया जा रहा है कि 21 जून को नीट यूजी की दोबारा परीक्षा हो रही है और उससे चार दिन पहले राहुल कोटा जा रहे हैं, जहां से बड़ी संख्या में छात्र इस परीक्षा में शामिल होते हैं। लेकिन इस आलोचना का कोई आधार नहीं है क्योंकि केंद्र सरकार की विफलता ने छात्रों को इस स्थिति में डाला है कि तीन मई को परीक्षा देने बाद फिर से उनको 21 जून को परीक्षा देनी पड़ रही है।
राहुल ने छात्र सम्मेलन के लिए जगहों का चुनाव बहुत सोच समझ कर किया है। ये चारों शहर उत्तर भारत में शिक्षा के सबसे बड़े केंद्र हैं। कोटा सबसे बड़ा कोचिंग सेंटर है तो पटना का मुसल्लहपुर इलाका दूसरा सबसे बड़ा कोचिंग सेंटर है। प्रयागराज और दिल्ली सबसे पुराने सेंटर रहे हैं, जहां छात्र प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी करने पहुंचते हैं। सो, चारों शहरों में राहुल के छात्र सम्मेलन को निश्चित रूप से बड़ी संख्या में छात्रों का समर्थन मिलेगा। इस समय जो भी व्यक्ति छात्रों की बात उठा रहे है युवा और छात्र उससे जुड़ रहे हैं। ऑनलाइन कोचिंग चलानों वाले ने छात्रों का समर्थन किया या कॉकरोच जनता पार्टी उनके समर्थन में उतरी तो छात्रों ने उनका पूरा साथ दिया। दिल्ली के जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र जुटे। तभी सवाल है कि क्या राहुल गांधी ने सीजेपी को पीछे छोड़ कर छात्रों का समर्थन हासिल कर पाएंगे?
यह संभव है क्योंकि सीजेपी के आंदोलन बहुत व्यवस्थित यानी स्ट्रक्चर्ड नहीं है। छह जून के प्रदर्शन के बाद उनके प्रदर्शन की तारीख बदल रही है। पहले कहा गया था कि सात दिन में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं होता है तो जंतर मंतर पर फिर प्रदर्शन होगा। लेकिन उसे 20 जून तक टाल दिया गया। कहा जा रहा है कि सीजेपी के लोगों को कहीं से सूचना मिली है कि 20 जून तक केंद्रीय मंत्रिपरिषद में फेरबदल होगी और उसमें धर्मेंद्र प्रधान को हटा दिया जाएगा। ऐसा हो जाता है तो उनको प्रदर्शन करने की जरुरत नहीं रह जाएगी। सीजेपी को समझ में नहीं आ रहा है कि समस्या सिर्फ एक मंत्री या एक व्यक्ति नहीं है, बल्कि समस्या संरचनागत है, जिसे व्यापक बदलाव के बगैर ठीक नहीं किया जा सकता है। कांग्रेस यह मुद्दा उठा सकती है और व्यापक स्ट्रक्चरल बदलाव का वादा कर सकती है। इससे युवाओं और छात्रों का ज्यादा समर्थन कांग्रेस को मिल सकता है। परंतु यह तब होगा, जब राहुल गांधी कांग्रेस के पूरे संगठन को इसमें लगाएंगे और निरंतरता जारी रखेंगे। अभी तक उन्होंने इस मामले में सिर्फ सोशल मीडिया के जरिए दखल दिया था। अपने ड्रॉइंग रूम में बैठ कर उन्होंने सीबीएसई की पोल खोलने वाले छात्रों से बात की थी और उनकी वीडियो पोस्ट किया था। सड़क पर उतर कर उनकी बात उठाएंगे तो विरोध की विश्वसनीयता बढ़ेगी और छात्रों का उनके ऊपर भरोसा भी बढ़ेगा।
