भाजपा ने जब आठ राज्यसभा सीटों के लिए उम्मीदवारों के नाम का ऐलान किया तो जिनको टिकट मिली उनसे ज्यादा चर्चा उन लोगों की हुई, जिनको टिकट नहीं मिली। भाजपा ने जिनको टिकट दी उनकी चर्चा इस लिहाज से थी कि ‘ये कौन हैं’! ज्यादतर लोगों की बड़ी राजनीतिक पहचान नहीं है और कई लोगों के बारे में तो भाजपा के लोग ही अच्छे तरीके से नहीं जानते हैं। उनके बारे में गूगल को भी ज्यादा जानकारी नहीं थी। लेकिन जिनके बारे में गूगल को पूरी जानकारी थी उनको भाजपा ने टिकट नहीं दी। तभी ज्यादा चर्चा संभावित दावेदारों, जिनको टिकट नहीं मिली और जिनकी टिकट कटी उनकी रही। जिनको टिकट मिली उनमें सबसे ज्यादा चर्चा श्रुति गंगवार की रही, जिनके पिता झारखंड के राज्यपाल हैं। कहा जाता है कि भाजपा एक परिवार में दो पद नहीं देती है। इसी लिहाज से श्रुति गंगवार की चर्चा रही।
बहरहाल, इस बार फिर कवि कुमार विश्वास राज्यसभा जाते जाते रह गए। उनका नाम इस बार तय बताया जा रहा था। वैसे पिछले कई बरसों से हर संभावित सूची में उनका नाम होता है। लेकिन इस बार कहा जा रहा था कि चुनाव हैं और उनकी तपस्या भी बहुत बड़ी है तो शायद मौका मिल जाए। ऐसे ही नए महामंत्रियों हरीश द्विवेदी और स्मृति ईरानी की भी चर्चा थी। लेकिन उनको भी टिकट नहीं मिली। कहा जा रहा है कि दोनों को 2029 का लोकसभा चुनाव लड़ाया जा सकता है। अरुण सिंह और नीरज शेखर जैसे दिग्गज ठाकुर नेताओं की टिकट कट जाना भी मामूली बात नहीं है। उनकी जगह जिन राम प्रताप सिंह चौहान को लाया गया है उनकी कोई खास पहचान नहीं है। हालांकि बताया जा रहा है कि वे राजऩाथ सिंह के करीबी हैं। लेकिन अरुण सिंह तो रिश्तेदार ही थे। ऐसे ही कल्याण सिंह के बेटे राजवीर सिंह को टिकट नहीं मिलने की भी खूब चर्चा है। खैर, भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने यह सुनिश्चित किया कि जिन लोगों ने भी सोशल मीडिया में जो भी सूची दिखाई है उनमें से किसी को राज्यसभा नहीं भेजा जाए।
