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भाजपा टीएमसी के तीनों सांसदों को फिर उतारेगी

New Delhi, Apr 04 (ANI): Opposition uproar in the Lok Sabha over the Waqf (Amendment) Bill 2025 during the Budget session of Parliament, in New Delhi on Friday. (ANI Photo/Sansad TV)

असली ऑपरेशन लोटस की शुरुआत कर्नाटक में बीएस येदियुरप्पा ने की थी, जब उन्होंने एक एक करके कांग्रेस विधायकों के इस्तीफे कराए थे और उनको भाजपा की टिकट से चुनाव लड़ा कर अपनी पहली सरकार का बहुमत बनाया था। बाद में इसे अलग अलग तरीके से भाजपा ने कई जगह अपनाया। पश्चिम बंगाल में राज्यसभा सांसदों के मामले में इसे बिल्कुल उसी अंदाज में अपनाया जा रहा है, जैसा कर्नाटक में या ओडिशा में किया गया। राज्य में भाजपा की सरकार बनते ही तृणमूल कांग्रेस के तीन राज्यसभा सांसदों ने इस्तीफा दे दिया। चुनाव आयोग ने तीनों सीटों के लिए अलग अलग उपचुनाव की अधिसूचना जारी। अलग अलग अधिसूचना का मतलब है कि तीनों सीटों के अलग चुनाव होंगे और हर सीट जीतने के लिए 145 वोट की जरुरत होगी।

जाहिर है राज्य में सत्तारूढ़ भाजपा तीनों सीटों पर जीतेगी। यह भी लगभग तय माना जा रहा है कि तृणमूल से इस्तीफा देने वाले तीनों सांसदों को वापस भाजपा की टिकट दे दी जाएगी और जीतने के बाद वे भाजपा के सांसद हो जाएंगे। 14 जुलाई तक नामांकन की आखिरी तारीख है। माना जा रहा है कि भाजपा की ओर से सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देब और प्रकाश चिक बड़ाइक को टिकट दे दी जाएगी। ओडिशा में इसी तरह से बीजू जनता दल के तीन सांसदों का एक एक करे इस्तीफा कराया गया और उनको भाजपा से सांसद बनाया गया। बंगाल की तीनों सीटें जीतने के बाद उच्च सदन में भाजपा की अपनी सीटें बढ़ कर 117 हो जाएंगी यानी वह अपने दम पर बहुमत से सिर्फ छह सीट पीछे रहेगी। सहयोगियों के साथ उसे 161 सीटों तक पहुंचना है ताकि दो तिहाई बहुमत हो सके। वह डेढ़ सौ के आसपास पहुंच गई है।

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