प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में फेरबदल का मामला कई महीने से चर्चा में है। अब कहा जा रह है कि पहले परिसीमन का बिल पास होगा और उसके बाद ही फेरबदल होगी। परिसीमन बिल का अर्थ है कि एक साथ तीन बिल पास कराना है। उसमें सबसे अहम महिला आरक्षण कानून में संशोधन का बिल है, जिसके लिए दो तिहाई बहुमत की जरुरत है। सरकार और भाजपा के प्रबंधक संख्या जुटाने में लगे हैं। जानकार सूत्रों का कहना है कि संख्या जुटाने के अभियान में मंत्रिमंडल फेरबदल का इस्तेमाल होना है। नई पार्टियों और नए नेताओं को मंत्री बनाने का प्रलोभन दिया जा रहा है।
पार्टियों को सरकार में शामिल कराने के प्रयास चल रहे हैं। बताया जा रहा है कि एक साथ कई प्रयास हो रहे हैं। एमके स्टालिन की पार्टी को एनडीए में लाने का प्रयास हो रहा है तो ममता बनर्जी की पार्टी से अलग होकर 20 सांसद जिस एनसीपीआई में गए हैं उसके विलय की बात हो रही है। अगल विलय नहीं होता है तो 17 सांसद भाजपा में शामिल हो सकते हैं और बाकी तीन सरकार को बाहर से समर्थन देंगे।
भाजपा को सबसे ज्यादा उम्मीद डीएमके से है। उसको लग रहा है कि कांग्रेस और उसके साथ ही जितनी सेकुलर पार्टियां हैं, जिनमें लेफ्ट पार्टियां भी शामिल हैं उनका टीवीके से स्थायी तालमेल हो गया। दूसरी ओर अन्ना डीएमके नीचे जा रही है। पिछले चुनाव में जीती उसकी दो सीटों पर उपचुनाव हुए थे। उन दोनों सीटों पर अन्ना डीएमके तीसरे स्थान पर चली गई। ई पलानीस्वामी के असर वाले पश्चिमी तमिलनाडु के कोंगू क्षेत्र में अन्नाडीएमके तीसरे स्थान पर रही और डीएमके दूसरे स्थान पर आ गई। इससे लग रहा है कि अब अगले कुछ दिन डीएमके बनाम टीवीके मुकाबला होगा।
ऐसे में डीएमके को एनडीए में आने में समस्या नहीं है। अगर डीएमके एनडीए में आए तो 22 लोकसभा सांसदों के दम पर उसे कम से कम चार मंत्री पद देने होंगे। यह फैसला होने के बाद ही मंत्रिमंडल में फेरबदल का काम होगा। शरद पवार अपनी पार्टी के एनडीए में जाने की संभावना से इनकार कर रहे हैं। लेकिन भाजपा की ओर से प्रयास किया जा रहा है। अगर वे एनडीए में नहीं जाते हैं तो उनकी पार्टी भी टूट सकती है। उनमें से दो को मंत्री पद देने की बात है।
गौरतलब है कि उद्धव ठाकरे की शिव सेना के छह सांसद एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हो गए हैं। इससे उसके सांसदों की संख्या 13 हो गई है। वह जनता दल यू से बड़ी पार्टी बन गई है। ऐसे में उसके नेता कम से कम दो मंत्री पद और मांग रहे हैं। एकनाथ शिंदे के बेटे श्रीकांत शिंदे के मंत्री बनने की चर्चा है। इसी तरह एनसीपीआई में गए ममता बनर्जी की पार्टी के कम से कम तीन सांसदों को मंत्री बनाए जाने की खबर है। इस तरह जो मंत्री पद खाली हैं और जो खाली होने वाले हैं उनके दावेदार भाजपा से बाहर ज्यादा हैं। जनता दल यू ने भी एक मंत्री पद की मांग रखी है। पहले जदयू के सांसद हरिवंश नारायण सिंह राज्यसभा के उप सभापति थे। लेकिन अब वे मनोनीत सांसद हैं। इस वजह से जदयू की ओर से संजय झा के लिए एक मंत्री पद की दावेदारी रखी गई है। सो, डीएमके, एनसीपीआई, शिव सेना, जदयू जैसी सहयोगी पार्टियों की ओर से कम से कम 10 मंत्री पद की मांग है। अगर परिसीमन से पहले मंत्रिमंडल फेरबदल होगी तो जितने लोग संतुष्ट होंगे उससे ज्यादा लोग नाराज होंगे। इस समय सरकार एक भी सांसद की नाराजगी अफोर्ड करने की स्थिति में नहीं है।
