महाराष्ट्र में मराठा नेता की वैकेंसी बन गई है। शरद पवार की राजनीति का आखिरी अध्याय चल रहा है और अजित पवार का निधन हो गया है। उनकी पत्नी या परिवार का कोई दूसरा सदस्य अभी तुरंत उनकी जगह लेने के योग्य नहीं है। शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले की शादी सदानंद सुले से हुई है, जिनकी जाति कायस्थ है। सुप्रिया की स्वीकार्यता मराठा राजनीति में नहीं होगी। सो, एकनाथ और उनके बेटे श्रीकांत शिंदे सबसे बड़े दावेदार हैं। लेकिन शरद पवार के पोते रोहित पवार ने शिंदे परिवार के लिए गंभीर चुनौती पेश की है। रोहित इस समय विधायक हैं और प्रदेश की राजनीति में शरद पवार के उत्तराधिकारी के तौर पर देखे जा रहे हैं।
रोहित राजनीति भी इसी अंदाज में कर रहे हैं। वे न तो सुनेत्रा पवार की पार्टी में अपनी पार्टी के विलय के पक्ष में हैं और न एनडीए के साथ जाने के पक्ष में हैं। उन्होंने परिसमीन का विरोध करने का ऐलान किया है। रोहित पवार ने कहा है कि परिसीमन से सीटें भले 50 फीसदी बढ़ जाएंगी लेकिन सरकार को मौका मिल जाएगा कि वह विधानसभा और संसदीय क्षेत्रों को अपने मनमाफिक आकार दे। इससे विपक्ष को नुकसान होगा। असल में रोहित पवार अपने दादा शरद पवार की राजनीति को बारीकी से समझ रहे हैं और उनको अंदाजा है कि मराठा, मुस्लिम और दलित मिला कर पश्चिमी महाराष्ट्र व मराठवाड़ा में राजनीति सफल हो सकती है। यह तभी होगा, जब पार्टी भाजपा के साथ जाने की बजाय स्वतंत्र अस्तित्व बनाए रखे। तभी प्रदेश में रोहित पवार की राजनीति पर नजर रखने की जरुरत है।
