Naya India-Hindi News, Latest Hindi News, Breaking News, Hindi Samachar

अखिलेश अजीबोगरीब बातें कर रहे हैं

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव देश के सबसे समझदार नेताओं में माने जाते हैं। उनका सेंस ऑफ ह्यूमर बहुत अच्छा है। वे  विपक्षी नेताओं पर चुटीले व्यंग्य करते हैं। तार्किक बातें करते हैं। लेकिन पता नहीं पिछले कुछ दिनों से उनको क्या हो गया है कि वे लगातार अजीबोगरीब बातें कर रहे हैं। जैसे पिछले दिनों उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि उन्होंने अपने परिवार के ही पांच लोगों को इसलिए लोकसभा की टिकट दे दी ताकि पार्टी नहीं टूटे। यह भी दावा किया गया कि पांच सांसद उनके परिवार के थे इसलिए पार्टी नहीं टूटी। सोचें, क्या परिवार वाली पार्टियां नहीं टूटती हैं? उनके अपने चाचा शिवपाल यादव ने पार्टी तोड़ दी थी। लालू यादव के बड़े बेटे ने अलग पार्टी बना ली है। चौटाला से लेकर ठाकरे, पवार से लेकर करुणानिधि और रामविलास पासवान से लेकर बादल तक शायद ही कोई राजनीतिक परिवार होगा, जिसमें टूट नहीं हुई है।

लेकिन पार्टी न टूटे इस आधार पर अखिलेश यादव ने परिवारवाद को जस्टिफाई किया। इसी तरह एक दिन उन्होंने कहा कि भाजपा जयंत चौधरी की पार्टी रालोद को 73 सीटें देगी। लेकिन इसके एक ही दिन बाद उन्होंने कह दिया कि रालोद जवन्नी पार्टी है। पहले अगर उनकी रणनीति रालोद का भाव बढ़ाने की थी ताकि वह भाजपा से ज्यादा सीट मांगे तो फिर उसे चवन्नी बताना क्या रणनीति है? इससे उन्होंने जाटों को अपने से और दूर कर दिया। ऐसे ही एक दिन उन्होंने पीडीए में पीडी का मतलब पंडित बताया औऱ दूसरे दिन सामान्य वर्ग के लोगों के प्रदर्शन की आलोचना में बातें करने लगे। एक दिन अखिलेश यादव ने कहा कि सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी को भाजपा 39 सीटें देगी। दूसरे दिन पार्टी के नेता ओमप्रकाश राजभर के पीले गमछे का मजाक उड़ाते हुए अखिलेश ने कहा कि भाजपा तीन सीट भी दे दे तो बड़ी बात होगी। लग रहा है कि जैसे जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं वैसे वैसे अखिलेश यादव की रणनीति कंफ्यूजन वाली होती जा रही है।

Exit mobile version