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सिद्धारमैया-शिवकुमार का शक्ति परीक्षण

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पद नहीं छोड़ने जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वे पूरे पांच साल तक मुख्यमंत्री रहेंगे। उनकी कुर्सी के दावेदार और राज्य के उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि अभी उनका समय नहीं है। उनका समय 2028 में आएगा, जब वे फिर से राज्य में कांग्रेस की सरकार बनाएंगे। फिर भी अगले कुछ दिन में दोनों के बीच बड़ा शक्ति परीक्षण होने वाला है। सिद्धारमैया ने कहा है कि वे मंत्रिमंडल में फेरबदल करने वाले हैं। जल्दी ही यह काम होगा। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने ऐसे मंत्रियों पर निशाना साधा, जिन्होंने पिछले कुछ दिनों में राज्य में सत्ता परिवर्तन से जुड़ा बयान दिया है। यानी जिन लोगों ने सिद्धारमैया को हटा कर शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाए जाने की वकालत की उन पर मुख्यमंत्री की नजर है। सो, शक्ति परीक्षण यह होना है कि मुख्यमंत्री उन मंत्रियों को हटाने की कोशिश करेंगे, जो शिवकुमार के समर्थक हैं और शिवकुमार की कोशिश हर हाल में उनको बचाने की होगी। कांग्रेस के जानकार नेताओं का कहना है कि अपने लिए भले शिवकुमार कमजोर हैं और सीएम नहीं बन पा रहे हैं लेकिन अपने समर्थकों को बचाने के लिए वे पर्याप्त रूप से मजबूत हैं।

बहरहाल, डीके शिवकुमार का खुल कर समर्थन करने वालों में श्रम मंत्री संतोष लाड का नाम मुख्य है। उन्होंने शिवकुमार को सीएम बनाने की मांग भी की थी और हर मसले पर उनका साथ देते हैं। ऐसे ही वन व पर्यावरण मंत्री ईश्वर खांदरे को भी शिवकुमार का समर्थक माना जाता है। चिकित्सा शिक्षा और कौशल विकास मंत्री डॉ. शरण प्रकाश पाटिल भी डीकेएस के खेमे के माने जाते हैं। सहकारिता मंत्री केएन राजन्ना ने खुल कर कहा था कि सितंबर के बाद राज्य सरकार के नेतृत्व में क्रांतिकारी परिवर्तन होगा इनके नाम सार्वजनिक हो गए हैं लेकिन कई ऐसे मंत्री हैं, जिन्होंने सार्वजनिक रूप से डीकेएस के बारे में नहीं बोला है परंतु पार्टी आलाकमान तक अपनी बात  पहुंचाते रहे हैं। ऐसे मंत्रियों के बारे में भी मुख्यमंत्री को जानकारी है। इसी तरह एच इकबाल हुसैन जैसे कई विधायक हैं, जो डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाने की बात खुल कर करते रहे हैं।

जानकार सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने ऐसे मंत्रियों की सूची बनाई है, जिनको बाहर करना है और ऐसे विधायकों की सूची भी बनाई है, जिनको सरकार में नहीं शामिल करना है। दूसरी ओर डीके शिवकुमार का खेमा ऐसे मंत्रियों की सूची तैयार कर रहा है, जो खुल कर सिद्धारमैया का समर्थन करते हैं। उनके करीबी लोगों का कहना है कि भले शिवकुमार मुख्यमंत्री नहीं बन पा रहे हैं लेकिन अपने लोगों को बचाने, विरोधियों के नाम कटवाने और अपने लोगों को मंत्री बनाने में सक्षम हैं। राज्य में विधायकों और मंत्रियों का विभाजन लिंगायत, वोक्कालिगा और ओबीसी के आधार पर है और अब लिंगायत भी बंटे हुए दिख रहे हैं। कर्नाटक में अगर मुख्यमंत्री के समर्थक मंत्रियों की बात करें तो सतीश जरकिहोली का नाम सबसे पहले आता है। वे पीडब्लुडी मंत्री हैं। समाज कल्याण मंत्री एचसी महादेवप्पा, परिवहन मंत्री रामालिंगा रेड्डी, राजस्व मंत्री कृष्णा बायरे गौडा आदि सीएम के साथ हैं। राज्य के गृह मंत्री जी परमेश्वरा वैसे तो खुद ही मुख्यमंत्री पद के दावेदार हैं लेकिन अगर उनको सिद्धारमैया और शिवकुमार में से किसी को चुनना होगा तो वे सिद्धारमैया के साथ हैं। मंत्रिमंमडल फेरबदल में दोनों को अपने अपने समर्थकों की रक्षा करनी है। इसके लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और प्रभारी रणदीप सुरजेवाला के यहां दौड़ शुरू हो गई है।

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