उत्तर प्रदेश में 16 अक्टूबर को 10 सीटों में भाजपा की आठ और समाजवादी पार्टी की दो सीटें तय दिख रही हैं। लेकिन सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पिछली बार की तरह इस बार भी तीन उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रहे हैं। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा में इस समय पांच सीटें खाली हैं। इसलिए फैसला 398 विधायकों को करना है। इस लिहाज से एक सीट जीतने के लिए 37 वोट की जरुरत है। समाजवादी पार्टी को दो सीटें जीतने के लिए 74 वोट की जरुरत है, जिसका इंतजाम उसके पास है। इसके बाद सपा के पास 28 वोट बचते हैं। इसमें सपा को नौ वोट और जोड़ने होंगे तब उनका तीसरा उम्मीदवार चुनाव जीत पाएगा। वे तीसरी सीट पर ऐसा उम्मीदवार उतारना चाहते हैं, जिसे भाजपा और एनडीए के कुछ वोट दिला सकें।
भाजपा की सहयोगी निषाद पार्टी के नेता संजय निषाद की पिछले दिनों सपा के माता प्रसाद पांडेय से मुलाकात हुई थी। कहा जा रहा है कि सपा की नजर उनके पांच विधायकों पर हैं। चार निर्दलीय और ओमप्रकाश राजभर की पार्टी के छह विधायकों पर भी सपा की नजर है। अगर सपा इनमें से कुछ विधायकों की क्रॉस वोटिंग कराती है तो भाजपा के आठवें उम्मीदवार के लिए मुश्किल होगी। यह भी कहा जा रहा है कि भाजपा के जिन विधायकों को टिकट कटने का खतरा दिख रहा है वे भी क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं और सपा की टिकट से लड़ सकते हैं। लोकसभा चुनाव में अपनी परफॉरमेंस से अखिलेश इस आत्मविश्वास में हैं कि वे भाजपा और एनडीए में क्रॉस वोटिंग करा लेंगे। ऐसा हुआ तो विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के लिए बहुत बड़ा झटका होगा।
