एनसीपी का मामला सुलझाने में समस्या यह आ रहा है कि भाजपा की सहयोगी एनसीपी यानी सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी का विवाद बढ़ गया है। प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे खुल कर सामने आ गए हैं। दोनों सुनेत्रा पवार के राज्यसभा सांसद बेटे पार्थ पवार से परेशान हैं। पार्थ की ताकत तो बढ़ ही रही है लेकिन वरिष्ठ नेताओं के साथ बातचीत का उनका तरीका भी पार्टी नेताओं को पसंद नहीं आ रहा है। जो नेता अजित पवार के दोस्त थे उनके साथ भी पार्थ का रवैया अच्छा नहीं है। उन्होंने पार्टी पर कंट्रोल बना लिया है और उनके साथ उनकी मित्रमंडली और रिश्तेदार भर गए हैं। सुनेत्रा ने चुनाव आयोग को 11 लोगों की जो सूची भेजी उसमें सब परिवार या रिश्तेदार या पार्थ के दोस्त हैं। तभी प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे ने पार्टी तोड़ने का प्रस्ताव दिया है। कहा जा रहा है कि सुनेत्रा इन नेताओं को अलग थलग रखना चाहती हैं और दूसरे वे शरद पवार की पार्टी के नेताओं को भी अपनी पार्टी में नहीं लेना चाहती हैं।
जानकार सूत्रों का कहना है कि सुनेत्रा और पार्थ पवार से नाराज नेताओं ने अमित शाह से बात की है। फिर देवेंद्र फड़नवीस तक इसकी सूचना पहुंची। उसके बाद फड़नवीस सक्रिय हुए। फिर दोनों नेता फड़नवीस से मिलने गए। ध्यान रहे सुनेत्रा पवार की राजनीति फड़नवीस के हिसाब से चलती है। वे एनसीपी को एकनाथ शिंदे की शिव सेना के लिए चेक एंड बैलेंस के तौर पर इस्तेमाल करते हैं। इस खींचतान में भी मामला अटका है। भाजपा के सामने य़ह विकल्प है कि सुनेत्रा और शरद पवार दोनों की एनसीपी के विधायक और सांसदों को तोड़ कर सीधे भाजपा में शामिल करा ले। लेकिन वह ऐसा नहीं करना चाहती है। तभी दिल्ली से मुंबई तक लगातार बैठकों का दौर चल रहा है। अमित शाह, देवेंद्र फड़नवीस, एकनाथ शिंदे, शरद पवार और सुनेत्रा पवार को फैसला करना है।
