पता नहीं संसद में या देश के किसी दूसरे राज्य की विधानसभा में ऐसा हुआ है या नहीं कि पूरा सत्र बीत जाए और बिना किसी जायज कारण के नेता प्रतिपक्ष कार्यवाही में हिस्सा न ले। यह बिहार में हुआ है। बिहार का एक हफ्ते का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हुआ और 25 जुलाई को समाप्त हो गया। इस पूरे सत्र में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव नदारद थे। ऐसा नहीं है कि वे कोई जरूरी पारिवारिक जिम्मेदारी निभाने में व्यस्त थे। उससे तो वे काफी पहले दूर जा चुके हैं। उनके पिता लालू प्रसाद की पिछले दिनों तबीयत खराब हुई थी और उनको पटना का आईजीआईएमएस में भर्ती कराया गया था लेकिन तेजस्वी यादव वहां भी नहीं थे। जुलाई की शुरुआत में खबर आई थी कि वे विदेश दौरे पर जा रहे हैं। उसके बाद से उनकी कोई खोज खबर नहीं है।
उनकी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल का स्थापना दिवस पांच जुलाई को था। लेकिन तेजस्वी ने अपने विदेश दौरे की वजह से चार दिन पहले ही स्थापना दिवस मना लिया और उसके बाद दिल्ली आ गए, जहां से वे यूरोप चले गए। पूरे परिवार के साथ छुट्टी मनाने के लिए वे यूरोप गए। बाद में कहा गया कि 20 जुलाई को मानसून सत्र शुरू होगा तो वे लौट आएंगे। बीच में एक दिन खबर भी आई कि वे दिल्ली आ गए हैं। लेकिन वे न तो दिल्ली में दिखे और न पटना पहुंचे। इस बीच पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव भी हो रहा है, जिसमें राजद ने प्रत्याशी उतारा है। तेजस्वी को उस चुनाव की भी परवाह नहीं है। वहां उनकी उम्मीदवार तीसरे स्थान पर हैं और जमानता बचा पाना उनके लिए मुश्किल दिख रहा है। लेकिन तेजस्वी अभी तक वहां प्रचार के लिए भी नहीं गए हैं। बांकीपुर सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की है और जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर वहां से चुनाव लड़ रहे हैं। 28 जुलाई को प्रचार बंद होगा और 30 जुलाई को मतदान होना है।
