कुछ समय पहले सोशल मीडिया में रेल मंत्री को ट्रोल करने वाले लोग उनको रील मंत्री कहते थे। पिछले कुछ समय से उन्होंने रील्स बनानी बंद कर दी है। लेकिन अब उनसे ऊपर के स्तर पर रील बनाने का काम शुरू हो गया है। प्रधानमंत्री खुद रील्स बना कर सोशल मीडिया में पोस्ट कर रहे हैं। पहले उनकी रील्स उनकी पीआर टीम बनवाती थी। वे किसी कार्यक्रम में जाते थे तो फ्लाईओवर के ऊपर या टनल के अंदर उनके अकेले चलने, हाथ हिलाने आदि की रील्स बनती थी। लेकिन अब उन्होंने खुद रील्स बनानी शुरू कर दी है। 23 जुलाई को प्रधानमंत्री ने अपने मोबाइल से एक रील बना कर इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया। उसके बाद से कम के कम पांच रील वे बना चुके हैं। हर रील को करोड़ों व्यूज मिले हैं और लाखों लाइक्स आई हैं। यह किसी को आरटीआई लगा कर पूछना चाहिए कि एक्स आदि सोशल मीडिया हैंडल्स से प्रधानमंत्री को कितनी कमाई होती है। ध्यान रहे एक बार नितिन गडकरी ने कहा था कि वे सोशल मीडिया से चार लाख रुपए तक महीना कमा लेते हैं।
बहरहाल, प्रधानमंत्री की रील्स के जवाब में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी रील्स बनानी शुरू कर दी है। विपक्ष के लिए रील का जवाब रील है। पहले कांग्रेस के नेता प्रधानमंत्री या दूसरे मंत्रियों के रील्स बनवाने का मजाक उड़ाते थे। लेकिन अब उन्होंने इसे खुद भी अपना लिया है। संसद के मानसून सत्र के दौरान पिछले हफ्ते बारिश में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा सदन से निकले। मकर द्वार पर सीढ़ियों से उतर कर दोनों बारिश में खड़े हो गए। अच्छी बात है। बारिश में भीगने का अलग आनंद है। हालांकि दोनों जैसे ही बाहर आए कई सुरक्षाकर्मी छाता लेकर उनकी ओर लपके। लेकिन दोनों बारिश में खड़े रहे तो जाहिर है कि वे भीगना चाहते थे। इसकी रील बनी और सोशल मीडिया में शेयर किया गया। कांग्रेस की सोशल मीडिया की प्रभारी सुप्रिया श्रीनेत ने ‘अनस्टॉपेबल’ नाम से रील शेयर की। सोचें, संसद परिसर में बारिश में भीगना भी देश के लिए निरंतर काम करने का प्रतीक है।
बहरहाल, राहुल गांधी इतने पर नहीं रूके हैं। उनको भी रील का ऐसा चस्का लगा है कि उन्होंने अपनी मां सोनिया गांधी के पेट डॉग ‘नूरी’ के साथ एक रील बना कर सोशल मीडिया में पोस्ट किया। अब चारों तरफ ‘नूरी’ की चर्चा है। पहले राहुल के पेट डॉग ‘पिद्दी’ की चर्चा होती थी, जिसे वे हिमंत बिस्वा सरमा के साथ मीटिंग के दौरान तीन मिनट तक बिस्किट खिलाते रहे थे। वैसे कांग्रेस के अध्यक्ष रहे सीताराम केसरी के पेट डॉग का नाम ‘रूचि’ था, जिसे आते जाते कांग्रेस के नेता नमस्ते करते थे। बहरहाल, राहुल गांधी ने ‘नूरी’ के साथ रील बनाने के बाद एक रील ई-20 पेट्रोल को लेकर बनाई। वे घर से निकल कर रहे हैं और सामने खड़ी गाड़ी के पेट्रोल टैंक का ढक्कन खोल रहे हैं। फिर कहते हैं कि यहां तो पूरी दाल ही काली है। जाहिर है यह सिर्फ ‘जेन जी’ का मामला नहीं है। अब पक्ष और विपक्ष के नेता नई पीढ़ी के साथ साथ दूसरे लोगों को भी आकर्षित करने के लिए रील्स का सहारा ले रहे हैं। आखिर प्रधानमंत्री मोदी ने भी सात अगस्त को स्वदेशी आंदोलन के 121 साल पूरे होने के मौके पर एक हैंडलूम को प्रमोट करने के लिए एक रील बना कर पोस्ट की। सो, रील अब मुख्यधारा की राजनीति का माध्यम है। प्रधानमंत्री ने तो अपने नेताओं को एक्स और फेसबुक से आगे बढ़ कर इंस्टाग्राम पर रील बनाने के लिए प्रेरित किया है।
