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नीतीश पर हमले का नुकसान

आमतौर पर यह माना जाता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऊपर निजी हमले का राजनीतिक और चुनावी नुकसान होता है। विपक्षी पार्टियों में सबसे पहले अरविंद केजरीवाल ने इस बात को समझा और मोदी पर निजी हमला बंद कर दिया था। इसका लाभ यह होता था कि लोकसभा चुनाव में मोदी को वोट करने वाली जनता का बड़ा वर्ग विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी को वोट करता था।  हालांकि बाद में जब पार्टी स्थापित हो गई तब उन्होंने मोदी को टारगेट करना शुरू किया। इस बार ऐसी स्थिति बिहार में दिख रही है। बिहार में इस बार सारी पार्टियां नीतीश कुमार के ऊपर निजी हमला करने से बच रही हैं। उलटे नीतीश से सहानुभूति जताई जा रही है। लेकिन कांग्रेस के नेता इस बात को नहीं समझ रहे हैं। राहुल गांधी ने भी बिहार की रैलियों में नीतीश को निशाना बनाया और प्रियंका गांधी वाड्रा भी रैली करने पहुंची तो उन्होंने भी नीतीश को टारगेट किया।

कांग्रेस के नेता मान रहे हैं कि इसका नुकसान होगा। राहुल और प्रियंका दोनों ने नीतीश पर हमला करते हुए कहा कि उनको रिमोट कंट्रोल से चलाया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि नीतीश कुमार के हाथ में कुछ भी नहीं है और बिहार की डबल इंजन सरकार को दिल्ली से चलाया जा रहा है। दूसरी ओर नीतीश कुमार की हकीकत यह है कि उन्होंने अपने हिसाब से सीटों का बंटवारा कराया, सबसे बेहतर तरीके से सीटें बांटीं और जिस समय सारे युवा नेता पटना में बैठ कर बारिश बंद होने का इंतजार कर रहे थे ताकि हेलीकॉप्टर से उड़ सकें तब नीतीश ने सड़क के रास्ते जाकर एक दिन में सात सात रैलियां कीं। सबको पता है कि उनकी उम्र बहुत हो गई है और सेहत अच्छी नहीं है। लेकिन इस वजह से उनसे नाराजगी नहीं है। उम्र और सेहत की वजह से किसी से नाराजगी होनी भी नहीं चाहिए। उलटे नीतीश के प्रति इससे सहानुभूति का भाव है।

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