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अदालत की मौखिक टिप्पणियों और फैसलों का फर्क

New Delhi, May 22 (ANI): A view of the Supreme Court of India, in New Delhi on Thursday. (ANI Photo/Rahul Singh)

सुप्रीम कोर्ट की दो जजों जस्टिस उज्ज्वल भुइंया और जस्टिस बीवी नागरत्ना की बेंच ने सोमवार को जमानत के बारे में बड़ी टिप्पणी की। दोनों माननीय जजों ने कहा कि जमानत नियम है और जेल अपवाद है। उन्होंने यह भी कहा कि गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम कानून यानी यूएपीए के मामले में भी यही नियम लागू होता है। यानी यूएपीए मामले में भी जमानत का नियम होना चाहिए और अपवाद के तौर पर ही किसी को जेल भेजा जाना चाहिए। यह टिप्पणी करते हुए दोनों जजों ने जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद की जमानत खारिज होने का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जमानत खारिज करते हुए दो जजों की बेंच ने जमानत को लेकर दी गई सुप्रीम कोर्ट की बड़ी बेंच के फैसले की अनदेखी की।

कहने का अर्थ यह था कि उमर खालिद को भी जमानत मिलनी चाहिए। ध्यान रहे खालिद पांच साल से ज्यादा समय से जेल में बंद है। दो जजों की बेंच की टिप्पणियों से लगा कि अब खालिद को जमानत मिल जाएगी। हो सकता है कि आगे मिल भी जाए। लेकिन तात्कालिक मामला यह है कि मंगलवार को एक अदालत ने उनकी अंतरिम जमानत की याचिका भी खारिज कर दी। खालिद ने अपनी मां की सर्जरी के लिए 15 दिन की जमानत मांगी थी। लेकिन अदालत ने जमानत देने से इनकार कर दिया। सोचें, कहां जमानत पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और कहां अदालत का फैसला! लेकिन आजकल यह चलन बहुत आम हो गया है।

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